बिहार विधानसभा के बजट सत्र में बुधवार को कानून-व्यवस्था का मुद्दा जोरदार ढंग से उठा। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य में बढ़ती आपराधिक घटनाओं को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा गृह विभाग छोड़े जाने के बाद अपराधियों का मनोबल बढ़ा है और कानून-व्यवस्था की स्थिति कमजोर हुई है।
सदन में बोलते हुए तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि बिहार में हत्या, लूट, रंगदारी, अपहरण और दुष्कर्म की घटनाओं में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि अपराधियों में कानून का भय कम होता दिखाई दे रहा है और आम नागरिक स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
तेजस्वी ने कहा, “इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि मुख्यमंत्री ने गृह विभाग अपने पास नहीं रखा। जैसे ही विभाग उनके हाथ से गया, अपराध की घटनाएं बढ़ती दिख रही हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में बच्चियों और महिलाओं के साथ हो रही दुष्कर्म की घटनाएं अत्यंत चिंताजनक हैं और सरकार को इस पर कठोर कदम उठाने चाहिए।
गौरतलब है कि वर्तमान में गृह विभाग उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास है। तेजस्वी के बयान को राजनीतिक हलकों में मौजूदा गृह नेतृत्व पर सीधा निशाना माना जा रहा है।
इस दौरान नेता प्रतिपक्ष ने यह आरोप भी लगाया कि सदन में विपक्ष को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष के विधायक गंभीर मुद्दे उठाते हैं तो सत्ता पक्ष के सदस्य हंगामा कर चर्चा को बाधित करते हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के विरुद्ध बताया।
उधर, सत्ता पक्ष के नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि राज्य सरकार अपराध नियंत्रण के लिए प्रतिबद्ध है तथा पुलिस-प्रशासन लगातार कार्रवाई कर रहा है।
विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राज्यसभा चुनाव के प्रश्न पर तेजस्वी यादव ने कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया। बिहार की पांच सीटों पर प्रस्तावित चुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि “समय आने पर निर्णय लिया जाएगा।”
बजट सत्र के दौरान कानून-व्यवस्था का मुद्दा आने वाले दिनों में भी सदन की कार्यवाही में प्रमुखता से उठने की संभावना है।