वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ पूरे मुल्क में SDPI का जोरदार विरोध: रैलियां, धरने और बिल की प्रतियां जलाई गईं

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

वक्फ संशोधन बिल 2024 को संसद में पेश किए जाने के बाद देशभर में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) ने इसके खिलाफ तीखा विरोध शुरू कर दिया है। केरल, गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान, झारखंड और तमिलनाडु सहित पूरे मुल्क में SDPI कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर रैलियां निकालीं, धरने आयोजित किए और बिल की प्रतियों को जलाकर अपना गुस्सा जाहिर किया।

संसद में मंगलवार को इस बिल को पेश किए जाने के बाद SDPI ने इसे “मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर हमला” करार देते हुए तत्काल प्रभाव से विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। पार्टी का कहना है कि यह बिल वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता के नाम पर मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता को कमजोर करने की साजिश है।

केरल के कोल्लम में आयोजित एक रैली में SDPI नेताओं ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह बिल संविधान के खिलाफ है और इससे देश की धर्मनिरपेक्षता को खतरा है। वहीं, कर्नाटक के गुलबर्गा, मैसूर और मंगलुरु में अचानक हुए प्रदर्शनों में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। गुजरात के अहमदाबाद में भी SDPI कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर बिल के खिलाफ नारेबाजी की, हालांकि पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।

महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में भी बिल की प्रतियां जलाने की घटनाएं सामने आईं। SDPI के तमिलनाडु इकाई ने पुडुक्कोट्टई में एक प्रदर्शन के दौरान बिल को “असंवैधानिक” बताते हुए इसे जलाया। पार्टी के राष्ट्रीय नेता अब्दुल मजीद ने कहा, “हम सभी राजनीतिक दलों से अपील करते हैं कि वे इस बिल को लोकसभा और राज्यसभा में हराने के लिए एकजुट हों। यह मुस्लिम समुदाय के हितों के खिलाफ है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।”

विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई जगहों पर पुलिस के साथ तनाव की स्थिति भी देखी गई। कई जगहों पर धरनों को रोकने के लिए प्रशासन ने सख्ती बरती, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे। SDPI ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने इस बिल को वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

केंद्र सरकार का कहना है कि यह बिल वक्फ बोर्ड में पारदर्शिता लाने और महिलाओं को इसमें शामिल करने के उद्देश्य से लाया गया है। हालांकि, विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों ने इसे धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करार दिया है। इस मुद्दे पर देशभर में बहस छिड़ गई है और आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है।

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