वक्फ संशोधन बिल पर बवाल: जदयू में इस्तीफों की झड़ी, कई वरिष्ठ नेताओं ने छोड़ी पार्टी

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ बिहार में उठे विरोध के बाद जनता दल यूनाइटेड (जदयू) में बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देने वालों में जदयू के वरीय नेता, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के पदाधिकारी और युवा जदयू के प्रदेश सचिव शामिल हैं। इन नेताओं ने पार्टी के रुख से असहमति जताते हुए जदयू की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा की।

विरोध के स्वर और इस्तीफों की बाढ़

वक्फ संशोधन बिल को लेकर अल्पसंख्यक समुदाय में नाराजगी पहले से ही थी, लेकिन जदयू द्वारा इस बिल का समर्थन किए जाने के बाद पार्टी के भीतर भी असंतोष खुलकर सामने आ गया। सबसे पहले ढाका विधानसभा क्षेत्र से जदयू के वरीय नेता और विधानसभा प्रत्याशी डॉ. मो. कासिम अंसारी ने पार्टी छोड़ने की घोषणा की। इसके बाद जदयू अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. नूर आलम खान, जमुई जदयू के अल्पसंख्यक प्रदेश सचिव मो. शाहनवाज मलिक और युवा जदयू के प्रदेश सचिव सह सीतामढ़ी लोकसभा प्रभारी राजू नैयर ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया।

इन सभी नेताओं ने जदयू पर अल्पसंख्यकों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया और कहा कि वक्फ संशोधन बिल मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों पर सरकार का नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश है। उनका मानना है कि जदयू का इस बिल का समर्थन करना उसकी धर्मनिरपेक्ष छवि को कमजोर करता है।

गुलाम रसूल बलियावी भी दे सकते हैं इस्तीफा

जदयू के वरिष्ठ नेता मौलाना गुलाम रसूल बलियावी ने भी पार्टी के रुख पर नाखुशी जताई है। उन्होंने इदारा-ए-शरिया की बैठक बुलाई है, जिसमें वे इस मुद्दे पर बड़ा फैसला ले सकते हैं। बलियावी के बयान और उनके हालिया कदमों से यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि वे भी जल्द ही पार्टी से अलग हो सकते हैं।

जदयू में बढ़ता असंतोष, चुनावी समीकरण पर असर

इन इस्तीफों के बाद बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। जदयू लंबे समय से अल्पसंख्यकों को अपने साथ बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही थी, लेकिन वक्फ संशोधन बिल को लेकर पार्टी में उभरे असंतोष ने उसकी स्थिति को कमजोर कर दिया है। कई अन्य नेता और कार्यकर्ता भी पार्टी छोड़ने की तैयारी में हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जदयू नेतृत्व जल्द ही इस मुद्दे पर ठोस कदम नहीं उठाता, तो पार्टी को आगामी चुनावों में इसका भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। अल्पसंख्यक समुदाय की नाराजगी महागठबंधन के अन्य दलों को फायदा पहुंचा सकती है, जिससे बिहार की राजनीतिक तस्वीर बदल सकती है।

भविष्य की राह और संभावित बदलाव

वक्फ संशोधन बिल पर जारी विवाद के बीच अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जदयू नेतृत्व इस स्थिति से कैसे निपटता है। पार्टी से इस्तीफा देने वाले नेताओं का अगला कदम भी अहम रहेगा। क्या वे किसी अन्य दल में शामिल होंगे या स्वतंत्र रूप से अपनी राजनीतिक राह तय करेंगे, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

फिलहाल, वक्फ संशोधन बिल बिहार की राजनीति में एक बड़े मुद्दे के रूप में उभर चुका है और इसके असर से जदयू को उबरने में समय लग सकता है।

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