इंसाफ़ टाइम्स डेस्क
दिल्ली के साकेत कोर्ट परिसर में बुधवार सुबह एक सनसनीखेज घटना घटी, जब कोर्ट के लॉकअप में बंद विचाराधीन कैदी अमन पोद्दार (24) की उसी लॉकअप में मौजूद दो अन्य कैदियों जितेंद्र उर्फ जिट्टे और जयदेव उर्फ बच्चा ने बेरहमी से हत्या कर दी। यह घटना कोर्ट लॉकअप के सेल नंबर 5 में घटी, जिसमें उस वक्त लगभग 34 अन्य विचाराधीन कैदी मौजूद थे। पुलिस मौके पर थी, लेकिन लॉकअप के अंदर समय पर नहीं पहुंच सकी।
घटना का विवरण:
समय: बुधवार सुबह करीब 10 बजे
जगह: साकेत कोर्ट परिसर, लॉकअप सेल नंबर 5
पृष्ठभूमि: जांच में पता चला है कि अमन और जितेंद्र के बीच वर्ष 2024 से चली आ रही पुरानी दुश्मनी थी। अमन ने पहले जितेंद्र पर चाकू से हमला किया था। उसी रंजिश के चलते जितेंद्र और जयदेव ने मिलकर उसकी हत्या कर दी।
गवाहों ने बताया कि जितेंद्र ने अमन को पकड़कर दीवार पर पटका, सिर दीवार से टकराया। इसके बाद दोनों आरोपियों ने अमन पर लात-घूंसे बरसाए और उसके सिर को पैरों से दबाया गया। कुछ कैदियों ने बताया कि उसकी सांसें रोकने की भी कोशिश की गई।
सुरक्षा में चूक
घटना दो कुंडियों वाले लॉकअप सेल में हुई, जिससे पुलिस समय पर अंदर नहीं पहुंच सकी।
पूरा हमला एक मिनट से भी कम वक्त में अंजाम दे दिया गया।
जेल मैनुअल के मुताबिक, दुश्मन कैदियों को एक साथ नहीं रखा जाना चाहिए, लेकिन यह नियम पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।
जांच और कार्रवाई:
पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी गई है।
34 गवाहों और अन्य कैदियों से पूछताछ चल रही है।
कोर्ट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की लापरवाही पर भी सवाल उठ रहे हैं।
साकेत बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव दिल बंग सिंह कसाना ने कहा “यह गंभीर लापरवाही है कि दुश्मन कैदियों को एक ही सेल में रखा गया। अब वक्त आ गया है कि पेशी के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को अनिवार्य किया जाए।”
दिल्ली के एक कोर्ट परिसर में हुए इस जघन्य हत्याकांड ने जेल और कोर्ट सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां न्याय होना चाहिए, वहीं एक निर्दोष विचाराधीन कैदी की हत्या — यह घटना न्यायिक प्रक्रिया की सुरक्षा और पारदर्शिता दोनों को कठघरे में खड़ा करती है।
