इंसाफ़ टाइम्स डेस्क
उत्तर प्रदेश में दलितों के प्रति हिंसा की एक और शर्मनाक घटना सामने आई है। फतेहगढ़ में एक 15 वर्षीय दलित छात्रा के साथ पुलिस की वर्दी में तैनात कांस्टेबल ने कथित रूप से बंदूक की नोक पर चलती गाड़ी में बलात्कार किया। घटना के बाद ग्रामीणों ने साहस दिखाते हुए आरोपी को मौके पर ही पकड़ लिया, जबकि उसका साथी ड्राइवर फरार हो गया।
सुबह लगभग 8 बजे पीड़िता स्कूल जा रही थी। तभी आरोपी कांस्टेबल विनय चौहान, जो वर्दी में था, ने उसे स्कूल के पास रोका और जबरन गाड़ी में बैठा लिया। एफआईआर में दर्ज विवरण के अनुसार, चलती कार में ही विनय ने पीड़िता के साथ बलात्कार किया। जब लड़की ने विरोध किया, तो उसने उस पर बंदूक तान दी और जान से मारने की धमकी दी।
घटना के बाद जब आरोपी पीड़िता को गाड़ी से फेंकने की कोशिश कर रहा था, तब कुछ ग्रामीणों ने संदेह होने पर तुरंत गाड़ी रोकी और विनय चौहान को पकड़ लिया। पीड़िता के पिता ने बताया “हमने उसकी गाड़ी रोकी और उसे पकड़ लिया। मेरी बेटी बहुत डरी हुई थी। उसका साथी ड्राइवर भाग गया।”
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। उसके खिलाफ धारा 376 (बलात्कार), 363 (अपहरण), 506 (धमकी), और SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
विनय चौहान को निलंबित कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। फरार साथी की तलाश जारी है।
सवाल उठते हैं कि क्या यूपी पुलिस में दलितों के खिलाफ अत्याचार करने वालों को अब भी संरक्षण मिल रहा है? वर्दी में छुपे ऐसे भेड़ियों को आखिर कौन रोक रहा है? दलित बच्चियों की सुरक्षा किसकी ज़िम्मेदारी है?
