पटना बना हत्याओं और अपराध का अड्डा, खेमका हत्याकांड जैसे दर्जनों मामलों ने राजधानी को किया भयभीत

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

बिहार की राजधानी पटना आज ‘अपराध की राजधानी’ के नाम से पहचानी जाने लगी है। कभी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक पहचान रखने वाला शहर अब हत्या, लूट, रेप और डकैती जैसे अपराधों का पर्याय बनता जा रहा है। इसका सबसे ताजा उदाहरण है मशहूर व्यवसायी गोपाल खेमका की दिनदहाड़े हत्या, जिसने पूरे राज्य को दहला दिया है।

लेकिन खेमका हत्याकांड कोई अकेली घटना नहीं है — पटना में पिछले 5 महीनों में 116 लोगों की हत्या हुई, और इन सभी मामलों की पृष्ठभूमि, प्रशासनिक विफलता और पुलिसिया सुस्ती एक जैसी रही है।

दैनिक भास्कर की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 5 महीनों में राजधानी पटना में दर्ज अपराधों के आंकड़े बेहद डराने वाले हैं, ये आंकड़े निम्नलिखित हैं

116 हत्याएं
2335 वाहन चोरी
343 घर में सेंधमारी (गृहभेदन)
47 लूट की वारदातें
41 दुष्कर्म
44 चैन स्नैचिंग
11 डकैती
13 रंगदारी के मामले

इससे साफ है कि हर 24 घंटे में औसतन एक हत्या, 15 वाहन चोरी और हर तीसरे दिन एक बलात्कार की घटना सामने आ रही है।

2 जुलाई 2025 की शाम, पटना के एक व्यस्त इलाके में जानी-मानी व्यापारिक हस्ती गोपाल खेमका की गोली मारकर हत्या कर दी गई। शुरुआती जांच में जमीन विवाद और सुपारी किलिंग का एंगल सामने आया है।

आईजी जितेंद्र राणा ने मीडिया को बताया कि मामले की जांच कई पहलुओं से की जा रही है। पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा की निगरानी में SIT गठित की गई है। STF और SIT की टीमें फतुहा, आरा और पटना के अन्य इलाकों में लगातार छापेमारी कर रही हैं।

सूत्रों के मुताबिक, बेऊर जेल से मिले इनपुट के आधार पर जांच की दिशा बदली है। पुलिस ने कुख्यात अपराधी अजय वर्मा से लंबी पूछताछ की है। संदेह है कि खेमका की हत्या में उसी के गैंग का हाथ है।
अब तक 5-6 संदिग्ध हिरासत में लिए जा चुके हैं, और खेमका के छोटे बेटे डॉ. गौरव खेमका के बयान पर गांधी मैदान थाने में केस दर्ज किया गया है।

खेमका हत्याकांड ने बिहार की राजनीति को भी झकझोर दिया है। डिप्टी सीएम अशोक चौधरी समेत कई नेता मृतक के परिवार से मिलने पहुंचे, लेकिन वहां खेमका की मां का गुस्सा डिप्टी सीएम पर फूट पड़ा।
परिवार के लोग खुलेआम कह रहे हैं कि “बिहार में अब कुछ भी सुरक्षित नहीं रहा।”

तेजस्वी यादव से मुलाकात में मृतक की बहन ने कहा – “हमें सिर्फ इंसाफ चाहिए, और दोषियों को फांसी।”
तेजस्वी ने नीतीश सरकार पर हमला बोलते हुए कहा — “जब राजधानी में इस तरह की हत्याएं हो रही हैं, तो बाकी जिलों की क्या हालत होगी?”

वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट करते हुए लिखा “डबल इंजन की सरकार ने बिहार को क्राइम की राजधानी बना दिया है। यहां व्यापारियों की हत्या आम हो गई है और सरकार मूक दर्शक बनी बैठी है।”

पटना में व्यवसायी, डॉक्टर, पत्रकार, शिक्षक, छात्र — कोई भी सुरक्षित नहीं महसूस कर रहा है। आए दिन गोलीबारी, लूट, और दुष्कर्म की घटनाएं सोशल मीडिया और न्यूज हेडलाइंस में दिखाई दे रही हैं।

सवाल उठता है कि “जब राजधानी में अपराधियों की समानांतर सत्ता चल रही हो, तब सरकार की ताकत कहां है? क्या नीतीश सरकार और उनकी पुलिस मशीनरी इन घटनाओं पर नियंत्रण पा सकेगी? या फिर गोपाल खेमका जैसे अन्य मामलों की तरह ये केस भी सरकारी फाइलों में गुम हो जाएगा?”

पटना में आज डर बिक रहा है, और अपराध फल-फूल रहा है।
सरकार को अब सिर्फ बयानबाज़ी नहीं, जमीनी कार्रवाई करनी होगी। वरना जनता का विश्वास और व्यापारियों का साहस दोनों धीरे-धीरे खत्म होता चला जाएगा।

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