पूर्णिया में आदिवासी परिवार की हत्या पर राहुल गांधी ने की फोन पर बातचीत, न्याय दिलाने का दिया भरोसा

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

पूर्णिया जिले के टेटगामा गांव में पांच आदिवासी लोगों की निर्मम हत्या के बाद देशभर में शोक और आक्रोश का माहौल है। इस जघन्य कांड पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने रविवार को पीड़ित परिवार से फोन पर बातचीत की। उन्होंने परिजनों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी उनके साथ है और उन्हें न्याय दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा।

गौरतलब है कि टेटगामा गांव में 6 जुलाई की रात गांव के ही एक परिवार के पांच सदस्यों को डायन बताकर भीड़ ने पहले बेरहमी से पीटा, फिर पेट्रोल और डीजल डालकर आग के हवाले कर दिया। मृतकों में बाबूलाल उरांव, उनकी पत्नी, मां, बहू और बेटा शामिल हैं। इस अमानवीय कृत्य के बाद पीड़ितों के शव गांव से कुछ दूरी पर एक तालाब से बरामद हुए।

पुलिस ने अब तक इस मामले में 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है, लेकिन केवल तीन लोगों को ही गिरफ्तार किया गया है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि पुलिस कार्रवाई बेहद धीमी है और पीड़ित परिवार असुरक्षित महसूस कर रहा है।

कांग्रेस के आदिवासी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया के नेतृत्व में पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल रविवार को टेटगामा पहुंचा। इसी दौरान राहुल गांधी ने पीड़ित परिवार से फोन पर बात की। उन्होंने परिजनों से घटना की जानकारी ली और पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए।

राहुल गांधी ने कहा, “इस तरह की घटनाएं हमारे समाज के लिए कलंक हैं। यह हमला सिर्फ एक परिवार पर नहीं, पूरे आदिवासी समुदाय और इंसानियत पर है। हम इस लड़ाई में आपके साथ हैं और जब तक आपको न्याय नहीं मिलेगा, तब तक हम पीछे नहीं हटेंगे।”

घटना के बाद कांग्रेस पार्टी ने राज्य सरकार से न्यायिक जांच की मांग की है। पार्टी नेताओं ने कहा है कि पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता, सुरक्षा और पुनर्वास की ज़रूरत है। साथ ही दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर कड़ी सजा दी जानी चाहिए।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इस घटना ने बिहार में आदिवासियों और कमजोर वर्गों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने राज्य सरकार पर लापरवाही और संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर प्रशासन समय पर कार्रवाई करता, तो इतनी बड़ी त्रासदी को रोका जा सकता था।

टेटगामा कांड को लेकर पूरे देश में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। सामाजिक संगठनों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों ने इसे ‘सामूहिक हत्या’ बताते हुए सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है।

इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि 21वीं सदी के भारत में अंधविश्वास और जातिगत पूर्वाग्रहों के चलते अब भी आदिवासी और दलित समाज को किस हद तक उत्पीड़न और हिंसा का सामना करना पड़ता है।

राहुल गांधी की इस पहल को पीड़ित परिवार ने सकारात्मक बताया है और आशा जताई है कि उनके साथ न्याय होगा। हालांकि, गांव में अब भी भय और तनाव का माहौल बना हुआ है। स्थानीय प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठ रहे हैं और लोगों को उम्मीद है कि यह मामला केवल बयानबाज़ी तक सीमित न रह जाए, बल्कि दोषियों को जल्द से जल्द कड़ी सज़ा मिले

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