इंसाफ़ टाइम्स डेस्क
मौलाना आज़ाद नेशनल फेलोशिप (MANF), ओबीसी, एससी, एसटी और नॉन-नेट फेलोशिप जैसी प्रमुख छात्रवृत्तियों को बहाल कराने और लंबित राशि के शीघ्र भुगतान की मांग को लेकर स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (SIO) ने देशभर के सांसदों को ज्ञापन सौंपा है। संगठन की विभिन्न ज़ोनल कमेटियों के प्रतिनिधियों ने कई राज्यों में जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर इन मुद्दों को संसद में उठाने की अपील की।
SIO की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में मांग की गई है कि केंद्र सरकार MANF, ‘पढ़ो परदेस’ और अल्पसंख्यक प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं को पुनः शुरू करे, साथ ही MANF की लंबित राशि को तुरंत जारी कर छात्रों को हुए विलंब के लिए मुआवज़ा दिया जाए। संगठन ने नेशनल फेलोशिप फॉर ओबीसी (NFOBC) की चयन सूची को भी शीघ्र जारी करने और फेलोशिप वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बहाल करने की मांग की है।
SIO प्रतिनिधियों ने इस अभियान के तहत बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, असम और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में सांसदों से मुलाकात की। इनमें कांग्रेस के मोहम्मद जावेद, एमके राघवन, हिबी ईडन, ईटी मुहम्मद बशीर, वाम नेता अमरा राम, टीएमसी के खलीलुर रहमान, डीएमके के दुराई वैको, टीआरएस के वम्सी कृष्णा गड्डम और अन्य कई सांसद शामिल हैं।
इन जनप्रतिनिधियों ने SIO के मांग पत्र को समर्थन देते हुए संसद में आवाज़ उठाने का आश्वासन दिया है। कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद के माध्यम से वित्त मंत्रालय तक पहुंची मांगों के बाद 11 जुलाई को वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने पत्र जारी कर MANF की राशि को पीएम-यशस्वी योजना के तहत जारी करने की सहमति दी है।
SIO ने साफ किया है कि यह शुरुआत मात्र है। जब तक सभी छात्रवृत्ति योजनाएं बहाल नहीं होतीं और फेलोशिप वितरण पारदर्शी नहीं बनता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। संगठन ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो देशव्यापी छात्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।
*प्रमुख मांगे
MANF फेलोशिप का लंबित भुगतान और मुआवज़ा
MANF, पढ़ो परदेस और प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप की बहाली
OBC फेलोशिप चयन सूची की घोषणा
फेलोशिप प्रणाली में पारदर्शिता और नियमितता
शिक्षा बजट में हुई कटौती की वापसी
HRA व अन्य मदों में महंगाई के अनुसार संशोधन
नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल पर ब्लैकलिस्टिंग की समीक्षा
SIO का कहना है कि उच्च शिक्षा में वंचित तबकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ये छात्रवृत्ति योजनाएं अनिवार्य हैं। इन्हें बंद करना सामाजिक न्याय के मूलभूत सिद्धांतों के खिलाफ़ है।
SIO की मांगों को लेकर देशभर के छात्र संगठनों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी समर्थन जताया है। अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार इन आवाज़ों को कितना सुनती है।
