इंसाफ़ टाइम्स डेस्क
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के मीनापुर से विधायक राजीव कुमार उर्फ मुन्ना यादव के विवादित बयान ने बिहार की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। एक जनसभा के दौरान उन्होंने सवर्ण समाज को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि “अब मिश्रा, सिंह, झा और शर्मा का कोई गुजारा नहीं है। ये लोग बैकफुट पर हैं। बिहार की गद्दी अब बहुजनों की है।”
मुन्ना यादव के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा और जदयू नेताओं ने इसे समाज को बांटने वाला और आपत्तिजनक बताया है। वहीं, राजद की ओर से फिलहाल इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
विधायक ने कहा, “लालू प्रसाद यादव ने ऐसी राजनीतिक धारा बनाई है कि अब जब भी कोई बिहार की गद्दी पर बैठेगा, वह बहुजन ही होगा। मुट्ठी भर लोगों (सवर्णों) का जमाना गया। यदि किसी में हिम्मत है, तो सिर्फ सवर्ण नाम के आधार पर चुनाव जीतकर दिखाएं, उनकी मिट्टी पलीद हो जाएगी।”
उन्होंने यह भी कहा कि “सवर्ण समाज अब सिर्फ राज करेगा लेकिन फ्रंटफुट पर आना उनके बस की बात नहीं है। बिहार की जनता उनकी हैसियत जान चुकी है।”
विधायक ने जन सुराज अभियान चला रहे प्रशांत किशोर पर भी निशाना साधा और कहा, “प्रशांत किशोर हमारे नेता तेजस्वी यादव को नौवीं पास कहते हैं। लेकिन वे खुद क्या कर पाए? वे चाहते हैं कि फिर से जगन्नाथ मिश्रा जैसी सरकार आए, लेकिन ऐसा अब नहीं होगा।”
बयान पर विवाद गहराने के बाद मुन्ना यादव ने सफाई दी कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। उन्होंने कहा, “मेरे दस वर्षों के विधायक कार्यकाल में मैंने कभी जातीय टिप्पणी नहीं की। यह बयान सामाजिक न्याय की भावना से जुड़ा है।”
हालांकि सफाई के दौरान उन्होंने एक और विवादास्पद तुलना करते हुए कहा, “जैसे भगवान कृष्ण को माखन चोर कहकर प्रताड़ित किया गया, वैसे ही लालू यादव को चारा चोर कहा जाता है। लेकिन हम इन बातों से विचलित नहीं होते।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान 90 के दशक के उस विवादित नारे की याद दिलाता है, जब लालू यादव के शासनकाल में ‘भूरा बाल साफ करो’ का नारा चला था। भूरा बाल का तात्पर्य भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण और कायस्थ जातियों से था।
तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजद पिछले कुछ वर्षों से ‘A to Z’ फार्मूले पर काम कर रही है, जिसमें सभी जातियों को साथ लेकर चलने की कोशिश हो रही है। ऐसे में विधायक का यह बयान पार्टी की रणनीति के खिलाफ माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि इससे सवर्ण समुदाय में नाराजगी बढ़ सकती है और विपक्ष को मौका मिल सकता है।
भाजपा नेताओं ने चुनाव आयोग से शिकायत करते हुए इस बयान को आपराधिक कृत्य बताया है और आईपीसी की धारा 153ए के तहत मामला दर्ज करने की मांग की है। जदयू नेताओं ने इसे समाज को विभाजित करने वाली सोच का हिस्सा बताया है।
राजीव कुमार उर्फ मुन्ना यादव 2015 और 2020 में मीनापुर से विधायक चुने गए हैं। वे 12वीं पास हैं और उनके पास ₹88.75 लाख की संपत्ति है। myneta.info के अनुसार, उन पर दंगा, हमला और आर्म्स एक्ट सहित कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।
मुन्ना यादव के इस बयान ने एक बार फिर बिहार में जातीय राजनीति की बहस को तेज कर दिया है। जहां एक ओर वे इसे सामाजिक न्याय की आवाज बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे समाज में वैमनस्य फैलाने की कोशिश बता रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि राजद इस बयान से किनारा करती है या फिर इसे रणनीतिक आधार देती है।
