इंसाफ़ टाइम्स डेस्क
बिहार के जमुई जिले के चकाई विधानसभा क्षेत्र में शनिवार को आयोजित एनडीए कार्यकर्ता सम्मेलन में जबरदस्त हंगामा हुआ। इस दौरान बिहार सरकार के मंत्री सुमित कुमार सिंह और पूर्व एमएलसी संजय प्रसाद के समर्थक आपस में भिड़ गए। कार्यक्रम सोनो प्रखंड के बटिया दहियारी स्थित खेल मैदान में आयोजित किया गया था।
सूत्रों के अनुसार, सम्मेलन के दौरान मंत्री सुमित सिंह के समर्थक लगातार उनके पक्ष में नारेबाजी कर रहे थे। इससे नाराज पूर्व एमएलसी संजय प्रसाद ने आपत्ति जताई और मंच से यह सवाल किया कि सुमित सिंह किस हैसियत से मंच पर हैं, जबकि वह निर्दलीय विधायक हैं। इस बयान के बाद दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच बहस शुरू हो गई, जो जल्द ही हाथापाई में बदल गई।
स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने हस्तक्षेप किया और दोनों पक्षों को शांत करने की कोशिश की। मंच से समर्थकों को हटाने में पुलिस और नेताओं के अंगरक्षकों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। समर्थक एक-दूसरे पर लात-घूंसे चला रहे थे और पार्टी के झंडों से डंडा बनाकर मारपीट कर रहे थे। हालात को काबू में करने में पुलिस के पसीने छूट गए।
हंगामे के बाद संजय प्रसाद ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हमारे और हमारे समर्थकों की निष्ठा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अडिग है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस बार चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं और जदयू की टिकट पर चुनाव लड़ने की योजना बना रहे हैं।
हंगामे की असल वजह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। कुछ सूत्रों का कहना है कि यह विवाद नेताओं के भाषण को लेकर हुआ, जबकि कुछ का मानना है कि यह कुर्सी और टिकट को लेकर अंदरूनी राजनीति का हिस्सा था। पूर्व एमएलसी संजय प्रसाद ने मंच पर मंत्री सुमित सिंह की मौजूदगी पर सवाल उठाया था, जिससे विवाद और बढ़ गया।
यह घटना एनडीए के भीतर बढ़ते आंतरिक मतभेदों और टिकट वितरण को लेकर चल रही खींचतान को उजागर करती है। इससे पहले भी औरंगाबाद और नबीनगर में एनडीए कार्यकर्ता सम्मेलनों में इसी तरह के विवाद सामने आए थे, जो आगामी विधानसभा चुनावों से पहले गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े करते हैं।
इस हंगामे के बाद एनडीए नेताओं ने रविवार को जदयू मुख्यालय में बैठक बुलाने का निर्णय लिया है, जहां वे इस घटनाक्रम की समीक्षा करेंगे और आगामी रणनीति पर चर्चा करेंगे।
यह घटना आगामी विधानसभा चुनावों में एनडीए की एकजुटता और रणनीति पर असर डाल सकती है, जिससे गठबंधन के भीतर की राजनीति और भी दिलचस्प हो गई है।
