इनसाफ़ टाइम्स डेस्क
गुजरात की माइनॉरिटी को-ऑर्डिनेशन कमेटी (MCC) ने राज्य सरकार के शीर्ष अधिकारियों को कानूनी नोटिस भेजकर वडोदरा में हाल ही में हुई कथित पुलिस कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई है। संगठन ने आरोप लगाया है कि 26–27 अगस्त को पानीगेट इलाके में गणेश विसर्जन के दौरान गिरफ्तार मुस्लिम पुरुषों को हिरासत में प्रताड़ित किया गया और उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानजनक तरीके से घुमाया गया।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, 27 अगस्त को सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों में कई आरोपियों को पुलिस की मौजूदगी में सड़कों पर मार्च कराते हुए देखा गया। पुलिस ने इसे “रिकन्स्ट्रक्शन” की प्रक्रिया बताया, जबकि मानवाधिकार संगठनों और सामुदायिक नेताओं ने इसे कैदियों के अधिकारों का उल्लंघन और सार्वजनिक अपमान करार दिया!
MCC के संयोजक मुजाहिद नफ़ीस ने नोटिस में कहा है कि पुलिस का यह आचरण भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है, जो जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की गारंटी देता है। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के D.K. Basu बनाम पश्चिम बंगाल राज्य (1997) के फैसले में जारी दिशा-निर्देशों की भी अवहेलना की गई है। इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य हिरासत में यातना और पुलिस दुरुपयोग पर रोक लगाना है।
नोटिस में मांग की गई है कि संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए, दोषियों पर FIR दर्ज हो, पीड़ितों को मुआवजा और न्यायिक सहायता मिले, तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
MCC का कहना है कि घटना की व्यापक मीडिया कवरेज और जन-आलोचना के बावजूद अब तक न तो विभागीय जांच शुरू हुई है और न ही किसी अधिकारी पर कार्रवाई हुई है। यही कारण है कि संगठन ने अब कानूनी नोटिस भेजकर उच्च अधिकारियों को सीधे जवाबदेह ठहराने की पहल की है।
मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय समुदाय के नेताओं ने भी इस मामले में निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता की मांग की है। घटना ने राज्य में पुलिस की कार्यप्रणाली और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
