इंसाफ़ टाइम्स डेस्क
सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मोहम्मद शफी ने चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) ग्यानेश कुमार पर चुनावी धोखाधड़ी में संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की है।
शफी ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि कर्नाटक के CEO के खुलासों ने यह साबित कर दिया है कि झूठी फॉर्म-7 के जरिए मतदाताओं को सूची से हटाने की कोशिश की गई। दिसंबर 2022 में ECI के NVSP, VHA और Garuda पोर्टल के माध्यम से 6,018 से अधिक आवेदन जमा किए गए, जिनमें मुख्य रूप से OBC, SC, ST और कांग्रेस गढ़ के अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाया गया। 5,994 आवेदन खारिज किए गए, लेकिन 2,494 मतदाताओं को धोखाधड़ी रोकने से पहले ही हटाया जा चुका था।
मोहम्मद शफी ने कहा कि CEC ग्यानेश कुमार ने कर्नाटक CID को आवश्यक तकनीकी डेटा उपलब्ध कराने से इंकार किया, जिसमें IP एड्रेस, OTP ट्रेल और लॉगिन विवरण शामिल थे। उन्होंने इसे “डिजिटल बूथ कब्जा और राजनीतिक धोखाधड़ी” करार दिया, जिससे 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव के परिणाम पर असर पड़ सकता था।
एसडीपीआई ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में तुरंत जांच, CEC का इस्तीफा, रोके गए डेटा की रिलीज़ और पूरे देश के मतदाता रजिस्टर का ऑडिट कराने की मांग की है। पार्टी ने चेतावनी दी कि लोकतंत्र को संस्थागत धोखाधड़ी से बचाने के लिए दोषियों को कड़ी सजा दी जानी चाहिए।
मुहम्मद शफी ने यह भी कहा कि यह समस्या केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं है। महाराष्ट्र और महादेवपुरा में 2024 के लोकसभा चुनाव में भी बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी सामने आई, जबकि केरल के थ्रिस्सूर क्षेत्र में भी मतदाताओं के साथ धोखाधड़ी उजागर हुई।
