इंसाफ़ टाइम्स डेस्क
महाराष्ट्र के जालना जिले के एक छोटे गांव में 19 सितंबर को 12वीं सदी के महादेव मंदिर में कथित अपवित्रता के बाद साम्प्रदायिक तनाव फैल गया। पुलिस के अनुसार, मंदिर के अंदर मांस के टुकड़े फेंके गए थे, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश उत्पन्न हुआ।
पुलिस जांच में सामने आया कि 38 वर्षीय नंदकिशोर सुरेश वडगांवकर, जो भोकर्डन तहसील के अनवा गांव के निवासी हैं, ने यह कृत्य किया। सीसीटीवी फुटेज में उनकी पहचान हुई। पुलिस अधिकारी संतोष माने के अनुसार, वडगांवकर मंदिर के पास घर बनाने की अनुमति न मिलने से नाराज थे और व्यक्तिगत विवादों के कारण यह कदम उठाया।
घटना के बाद दक्षिणपंथी संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया और ‘हिंदू जन आक्रोश मोर्चा’ आयोजित किया। भोकरडन के छत्रपति शिवाजी चौक में हजारों लोग एकत्रित हुए। रैली में रत्नागिरी महाराज, कार्यकर्ता संग्राम भंडारे, विधायक संग्राम जगताप (राकांपा–अजीत पवार गुट) और अंबादास अंभोरे ने भाषण दिए। इन भाषणों में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ भड़काऊ और नफरत भरी टिप्पणियाँ की गई, जिससे तनाव और बढ़ गया।
इस विवाद के बाद गांव के कई मुस्लिम परिवारों ने अपने घर छोड़ दिए। साथ ही, माइनॉरिटी कॉलेजों के छात्रावास में रहने वाले छात्रों ने भी अपने हॉस्टल खाली कर घर लौटना शुरू किया।
मुस्लिम समुदाय के नेताओं ने एडिशनल एसपी आयुष नोपानी से मुलाकात कर रैली में शामिल नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने भी भड़काऊ भाषणों की कड़ी निंदा करते हुए पुलिस से निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई की अपील की।
स्थानीय लोग और समाजिक नेता मानते हैं कि यह घटना क्षेत्र में साम्प्रदायिक भावनाओं को भड़काने की साजिश का हिस्सा हो सकती है।
