इंसाफ़ टाइम्स डेस्क
ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस-ए-मुशावरत (AIMMM) ने उत्तर प्रदेश के बरेली में हाल ही में हुई हिंसा और इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) के प्रमुख मौलाना तौकीर रज़ा ख़ान की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की है। AIMMM ने इसे “संविधानिक अधिकारों का उल्लंघन” और “शांतिपूर्ण असहमति को दबाने का प्रयास” करार दिया है।
रविवार को हुई AIMMM की कार्यकारिणी और महासभा की बैठक में अध्यक्ष एडवोकेट फीरोज़ अहमद ने देश में बढ़ती साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण, लोकतंत्र की कमजोरी और मुसलमानों के खिलाफ सुनियोजित हमलों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “हमारा सबसे शक्तिशाली औजार वोट है, लेकिन आज वह भी कमजोर वर्गों से छीना जा रहा है। यह समय है कि उत्पीड़ित वर्ग एकजुट होकर रणनीति बनाएं और एक साथ कदम उठाएं।”
बैठक में बरेली हिंसा और मौलाना तौकीर रज़ा ख़ान की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की गई। AIMMM ने इसे “संविधानिक अधिकारों का उल्लंघन” और “शांतिपूर्ण असहमति को दबाने का प्रयास” करार दिया है।
संगठन ने पुलिस की कार्रवाई की भी आलोचना की, जिसमें “I Love Muhammad” नारे लगाने वालों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग किया गया। AIMMM ने इसे “संविधानिक अधिकारों का उल्लंघन” और “धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला” बताया।
इससे पहले, बरेली में 26 सितंबर को “I Love Muhammad” अभियान के समर्थन में आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई थी, जिसमें पुलिसकर्मियों सहित कई लोग घायल हो गए थे। मौलाना तौकीर रज़ा ख़ान को इस हिंसा का मुख्य आरोपी मानते हुए गिरफ्तार किया गया था।
AIMMM ने सरकार से मांग की है कि सभी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज झूठे और राजनीतिक मामलों को वापस लिया जाए और संविधानिक अधिकारों की रक्षा की जाए।
संगठन ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उत्पीड़न जारी रहा, तो मुसलमानों को एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करना होगा। AIMMM ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे साम्प्रदायिक सौहार्द बनाए रखें और संविधानिक मूल्यों की रक्षा करें।
इस घटना ने देशभर में संविधानिक अधिकारों, लोकतंत्र और धार्मिक स्वतंत्रता पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। AIMMM की यह पहल इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
