इंसाफ़ टाइम्स डेस्क
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ताजा रिपोर्ट ‘Prison Statistics India 2023’ ने देशभर की जेलों की भीड़भाड़ और अंडरट्रायल कैदियों की बढ़ती संख्या को उजागर किया है। बिहार की जेलें भी इस राष्ट्रीय तस्वीर का हिस्सा हैं, जहां कैदियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
बिहार में कुल 59 जेलें हैं, जिनमें 8 केंद्रीय जेल शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की जेलों में औसतन 173% अधिक कैदी बंद हैं। इस भीड़भाड़ के कारण न केवल प्रशासन पर दबाव बढ़ा है, बल्कि कैदियों की सुरक्षा और सुविधा भी प्रभावित हो रही है।
2023 में बिहार की जेलों में अंडरट्रायल कैदियों का अनुपात 74% से अधिक पहुँच गया है। 2022 में यह अनुपात 72% था। JNCRB की रिपोर्ट के अनुसार, यह न्यायिक प्रक्रिया में देरी और जमानत संबंधी कठिनाइयों का संकेत है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि बिहार की जेलों में असामान्य मौतों, खासकर आत्महत्या की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। 2022 के मुकाबले 2023 में आत्महत्या के मामले थोड़े बढ़े हैं, जो मानसिक स्वास्थ्य और कैदियों की सुरक्षा के लिए चुनौती बने हुए हैं।
बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद ने कहा, “जेल का मूल उद्देश्य सुधार गृह होना था, लेकिन यह कारागृह बनकर रह गया है। ओवरक्राउडिंग कम करने और सुधारात्मक प्रणाली लागू करने के लिए जेलों को सुधार गृह के रूप में विकसित करना जरूरी है।” उन्होंने कहा कि अंडरट्रायल कैदियों की बढ़ती संख्या में शराब बंदी कानून के तहत गिरफ्तार कैदियों का योगदान भी है।
NCRB 2023 की रिपोर्ट बिहार की जेलों में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करती है। भीड़भाड़, अंडरट्रायल कैदियों की उच्च संख्या और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं राज्य सरकार के लिए चुनौती हैं। प्रशासन को जेल सुधार, सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
