इंसाफ़ टाइम्स डेस्क
भाकपा-माले महासचिव काॅ. दीपंकर भट्टाचार्य ने पटना में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में भागलपुर जिले के पीरपैंती में प्रस्तावित अडानी पावर प्रोजेक्ट को “विकास नहीं, बल्कि विनाश का सौदा” करार दिया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से लाखों किसानों की जमीन, रोज़गार और पर्यावरण पर सीधा हमला हो रहा है।
दीपंकर भट्टाचार्य के नेतृत्व में पार्टी की एक उच्चस्तरीय जांच टीम ने 2 अक्टूबर को पीरपैंती का दौरा कर प्रभावित गांवों के किसानों से मुलाकात की। जांच टीम में घोषी विधायक रामबली सिंह यादव, पूर्व विधायक मनोज मंजिल, स्थानीय नेता महेश यादव, रणधीर यादव, रिंकू यादव, गौरीशंकर सहित भाकपा-माले, इंडिया गठबंधन और नागरिक समाज के प्रतिनिधि शामिल थे।
दीपंकर ने बताया कि अडानी समूह को मात्र एक रुपये सालाना किराये पर 1050 एकड़ उपजाऊ जमीन लीज पर दी जा रही है, जो आम के बगीचों से भरी पड़ी है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से न केवल लाखों पेड़ काटे जाएंगे बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका भी छिन जाएगी।
माले महासचिव ने आरोप लगाया कि सरकार अडानी को लाभ पहुंचाने के लिए किसानों की जमीन हड़प रही है, जबकि इलाके के लोगों को पहले से ही आम के बगीचों में रोजगार मिल रहा है। उन्होंने कहा, “यहां जिनके पास जमीन है और जिनके पास नहीं है—दोनों को बागानों से रोज़गार मिलता है। अब इन्हें उजाड़कर कॉर्पोरेट को फायदा पहुँचाना मोदी-नीतीश सरकार की साजिश है।”
दीपंकर ने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय भाजपा विधायक किसानों को धमका रहे हैं और विरोध करने पर जेल भेजने की चेतावनी दे रहे हैं। “मुखिया दीपक सिंह को उद्घाटन के दिन जेल भेज दिया गया, कई लोगों को नजरबंद किया गया। प्रशासन किसानों पर जमीन खाली करने का दबाव बना रहा है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने कहा कि अडानी पावर प्रोजेक्ट से रोजगार के अवसर बढ़ने के बजाय मौजूदा रोजगार खत्म हो जाएंगे और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ेगा। “मोदी जी से सवाल है कि वे मां के नाम पर पेड़ लगाते हैं या अडानी के नाम पर पेड़ कटवाते हैं?” दीपंकर ने कहा।
मुख्य बिंदु
1.एनटीपीसी से अडानी तक:
2010 में एनटीपीसी के नाम पर सात पंचायतों की जमीन अधिग्रहित की गई थी, लेकिन 15 साल बाद यह जमीन अडानी समूह को सौंप दी गई। किसानों का कहना है—“जमीन हमने बिहार सरकार को दी थी, अडानी को नहीं।”
2.मुआवजे में अनियमितता:
एक ही खेसरा की जमीन के लिए अलग-अलग दर पर मुआवजा दिया गया है। जिन किसानों के कागज अधूरे हैं, उन्हें मुआवजा नहीं मिला। कई गरीब किसानों को अब तक कोई भुगतान नहीं हुआ।
3.विस्थापन की समस्या:
कमालपुर टोले के लगभग 64 परिवार विस्थापन की जद में हैं। उन्होंने मांग की है कि सरकार उन्हें जमीन के बदले जमीन दे और उचित पुनर्वास सुनिश्चित करे।
4.रोज़गार पर संकट:
आम के बगीचे सात महीने तक लाखों लोगों को रोजगार देते हैं। प्रोजेक्ट के लागू होने से इनकी आजीविका पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
5.पर्यावरणीय खतरा:
कहलगांव और गोड्डा के पावर प्रोजेक्ट्स पहले से प्रदूषण फैला रहे हैं। अब पीरपैंती भी उसी राह पर है।
जांच दल के दौरे के दौरान गंगा कटाव पीड़ितों ने भी अपनी समस्याएं सामने रखीं। रानी दियारा पंचायत के वार्ड नंबर 12, 13 और 10 पूरी तरह गंगा में समा चुके हैं। प्रभावित परिवार पिछले दस वर्षों से रेलवे की जमीन पर रह रहे हैं, लेकिन अब तक उनका स्थायी पुनर्वास नहीं हुआ है। कई लोगों ने बताया कि उनके नाम वोटर लिस्ट से भी काट दिए गए हैं।
दीपंकर भट्टाचार्य ने चेतावनी दी कि “पीरपैंती की उपजाऊ जमीन अडानी को सौंपना किसानों, मजदूरों और पर्यावरण के खिलाफ अपराध है। जनता इस अन्याय का जवाब देगी।”
