”प्रशांत किशोर को चुनौती: मेरी घोषित संपत्ति से अधिक एक धूर भी दिखा दें, मैं गुलामी करने को तैयार” – मंत्री अशोक चौधरी

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

बिहार के ग्रामीण कार्य मंत्री और जदयू के राष्ट्रीय महासचिव अशोक चौधरी ने जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार और संपत्ति के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें खुली चुनौती दी है। मंत्री ने कहा, “मेरी घोषित संपत्ति से अधिक अगर कोई एक धूर भी जमीन दिखा दे, तो मैं गुलामी करने को तैयार हूं।”

अशोक चौधरी ने शुक्रवार को पटना स्थित जदयू कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि आरोप लगाना आसान है, लेकिन बिना प्रमाण के आरोपों का कोई आधार नहीं होता। उन्होंने कहा, “कल कोई कहे कि ट्रंप के साथ भी मेरी पार्टनरशिप है, तो क्या इसका मतलब है?”

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी बेटी शांभवी चौधरी द्वारा खरीदी गई संपत्ति पूरी तरह से वैध है और इसका उल्लेख उनके चुनावी हलफनामे में भी किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर के आरोप निराधार और भ्रामक हैं।

अशोक चौधरी ने यह भी कहा कि आरोपों के बावजूद उनकी राजनीतिक हत्या नहीं हो सकती। उन्होंने कहा, “हम पोस्टर-पंपलेट और झंडा बांधकर यहां तक पहुंचे हैं। मैं बिहार में जो राजनीतिक विरोधी हैं, उनकी छाती पर राजनीति करूंगा।”

प्रशांत किशोर ने हाल ही में आरोप लगाया था कि अशोक चौधरी और उनके परिवार ने पिछले दो सालों में 200 करोड़ रुपये की संपत्ति जुटाई है। इन आरोपों के जवाब में मंत्री ने प्रशांत किशोर को 100 करोड़ रुपये के मानहानि का नोटिस भेजा है। अदालत ने किशोर को समन जारी कर 17 अक्टूबर को पेश होने का निर्देश दिया है।

मंत्री ने यह भी कहा कि चुनाव नजदीक हैं और जनता की अदालत में सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महिला रोजगार योजना को महिलाओं के लिए आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण बताया और कहा कि नीतीश कुमार को प्रदेश की जनता का अटूट समर्थन प्राप्त है।

अशोक चौधरी ने यह भी कहा कि वह आगामी विधानसभा चुनाव में या तो खुद लड़ेंगे या फिर अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतारेंगे। उन्होंने कहा, “चुनाव लड़ेंगे, नहीं तो लड़ाएंगे।”

इस बयान से स्पष्ट है कि मंत्री अशोक चौधरी ने प्रशांत किशोर के आरोपों को गंभीरता से लिया है और उन्हें चुनौती दी है कि वे अपने आरोपों के प्रमाण पेश करें। अब देखना यह है कि इस मामले में अदालत क्या निर्णय देती है और बिहार की राजनीति में इसका क्या असर पड़ता है।

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