इंसाफ़ टाइम्स डेस्क
पंजाब बीजेपी ने शनिवार को केंद्र सरकार से मुस्लिम समुदाय को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदान किए गए अल्पसंख्यक दर्जे की समीक्षा करने की मांग की है। पार्टी प्रवक्ता सर्चंद सिंह खियाला ने कहा कि मुस्लिम समुदाय अब भारत में जनसांख्यिक और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थिति में है और इसलिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर अल्पसंख्यक नहीं माना जा सकता।
खियाला ने अपने बयान में कहा “मुस्लिम समुदाय की जनसंख्या अब 200 मिलियन से अधिक हो गई है, जो देश की कुल जनसंख्या का लगभग 16-17 प्रतिशत है। उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, केरल, असम और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में मुस्लिम समुदाय का राजनीतिक प्रभाव निर्णायक हो गया है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर अल्पसंख्यक विशेषाधिकार देना सामाजिक न्याय के अनुरूप नहीं है।”
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अल्पसंख्यक दर्जा राज्यवार आधार पर निर्धारित किया जाना चाहिए, जिससे स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार वास्तविक अल्पसंख्यकों को सुरक्षा और प्रतिनिधित्व मिल सके। इसके अलावा, खियाला ने आर्थिक आधार पर आरक्षण की वकालत की और इसे अधिक न्यायसंगत बताया।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में अल्पसंख्यक अधिकारों और आरक्षण को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो रही है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने इस प्रस्ताव पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि बीजेपी का यह कदम मुस्लिम समुदाय के खिलाफ है और उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
केंद्र सरकार ने हाल ही में संसद को बताया था कि मुस्लिमों की संख्या 197.5 मिलियन से अधिक हो गई है और अब यह आंकड़ा 200 मिलियन के पार पहुँच चुका है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक दर्जे की समीक्षा की जाती है, तो यह अन्य अल्पसंख्यक समुदायों जैसे सिख, जैन, ईसाई, बौद्ध और पारसी समुदायों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश हो सकता है।
राजनीतिक दलों के बीच इस मसले पर बहस जारी है और अब सभी की नजरें केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर हैं।
