“अमित शाह की गणित कमजोर है”: ओवैसी ने जनसंख्या और घुसपैठ पर किए दावों को बताया झूठा

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर मुस्लिम जनसंख्या और घुसपैठ को लेकर भ्रामक बयान देने का आरोप लगाया है। ओवैसी ने कहा कि अमित शाह “झूठ पर झूठ बोल रहे हैं” और जनसंख्या के आंकड़ों का राजनीतिक फायदा उठाने के लिए गलत तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं।

ANI को दिए साक्षात्कार में ओवैसी ने कहा, “अमित शाह ने कहा कि मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ रही है। वह झूठ बोल रहे हैं। 1951 से 2011 तक मुस्लिम आबादी में सिर्फ 4.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। मुझे लगता है कि उनकी गणित कमजोर है।”

ओवैसी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, “एक तरफ भागवत कहते हैं कि एक समुदाय की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है, दूसरी तरफ योगी आदित्यनाथ कहते हैं कि मूल जनसंख्या घट रही है। अब भागवत तीन बच्चों की सलाह दे रहे हैं। अगर दस लोग हैं और दस और बढ़ जाएं, तो वह 100 प्रतिशत वृद्धि लगती है — शायद अमित शाह को यही समझ नहीं है।”

ओवैसी ने सवाल उठाया कि जब गृह मंत्रालय के पास सीमाओं की सुरक्षा और आंतरिक नियंत्रण का पूरा अधिकार है, तो “घुसपैठ” रोकने की जिम्मेदारी खुद अमित शाह की है।
उन्होंने कहा, “अगर घुसपैठ हो रही है, तो आप मंत्री हैं, रोकिए। सरकार की अपनी रिपोर्ट बताती है कि मुस्लिमों की प्रजनन दर सबसे तेजी से गिरी है। फिर यह घुसपैठ का झूठ क्यों फैलाया जा रहा है?”

सरकारी और स्वतंत्र अध्ययनों के मुताबिक, मुस्लिम आबादी में वृद्धि दर लगातार घट रही है!1951 में भारत की कुल जनसंख्या में मुस्लिमों की हिस्सेदारी लगभग 9.8 प्रतिशत थी, जो 2011 में 14.2 प्रतिशत तक पहुंची — यानी करीब 4.4 प्रतिशत अंक की वृद्धि।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के अनुसार, 1992 में मुस्लिम महिलाओं की औसत प्रजनन दर 4.4 बच्चे प्रति महिला थी, जो 2019-21 में घटकर 2.3 रह गई।

हिंदू महिलाओं की दर इसी अवधि में 3.3 से घटकर 1.9 हो गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों समुदायों में प्रजनन दर घटने का मतलब है कि जनसंख्या संतुलन स्थिर हो रहा है, और घुसपैठ का कोई ठोस सबूत सरकारी आंकड़ों में नहीं मिलता।

अमित शाह ने हाल ही में कहा था कि “1951 से 2011 के बीच धार्मिक जनसंख्या में असंतुलन घुसपैठ के कारण बढ़ा है।” उन्होंने दावा किया था कि मुस्लिम आबादी में 24.6% की वृद्धि हुई, जबकि हिंदुओं की आबादी में 4.5% की गिरावट आई।

इस बयान के बाद विपक्षी दलों ने शाह को घेर लिया। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि “अमित शाह ‘डिसइन्फॉर्मेशन’ के घरेलू कारखाने बन चुके हैं।” वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सवाल किया, “अगर घुसपैठ हो रही है, तो गृह मंत्री पिछले 11 साल में क्या कर रहे थे?

विश्लेषकों का कहना है कि आबादी का मुद्दा चुनावी ध्रुवीकरण का साधन बन गया है। आंकड़े बताते हैं कि भारत में सभी समुदायों की जनसंख्या वृद्धि दर में कमी आई है। लेकिन इस विषय का राजनीतिकरण सामाजिक विभाजन को और गहरा कर सकता है।

सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज (CSDS) के एक शोधकर्ता ने कहा, “भारत में मुस्लिम आबादी वृद्धि दर घटने की गति दुनिया में सबसे तेज़ है। लेकिन राजनैतिक दल इसे भय पैदा करने के औजार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।”

ओवैसी का तर्क है कि मुस्लिम जनसंख्या में बढ़ोतरी “घुसपैठ” के कारण नहीं, बल्कि प्राकृतिक वृद्धि और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की वजह से हुई है। वहीं अमित शाह के दावे को लेकर सरकार के पास कोई सार्वजनिक डेटा नहीं है।
यह विवाद केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि उस राजनीतिक विमर्श का हिस्सा है जिसमें जनसंख्या, धर्म और नागरिकता को चुनावी मुद्दा बनाया जा रहा है।

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