इंसाफ़ टाइम्स डेस्क
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जनता दल (यूनाइटेड) के भीतर टिकट बंटवारे को लेकर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। भागलपुर के सांसद अजय कुमार मंडल ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर सांसद पद से इस्तीफा देने की अनुमति मांगी है। वहीं, भागलपुर के ही विधायक गोपाल मंडल टिकट कटने की आशंका से नाराज़ होकर सोमवार को मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठ गए।
अजय मंडल ने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर लिखा “मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी, कृपया मुझे सांसद पद से त्यागपत्र देने की अनुमति प्रदान करें। स्थानीय सांसद होने के बावजूद टिकट वितरण में मेरी कोई राय नहीं ली गई है। ऐसे में सांसद पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं रह गया है।”
उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि वे पिछले दो दशकों से पार्टी संगठन और जनता की सेवा कर रहे हैं, लेकिन विधानसभा टिकट बंटवारे की प्रक्रिया में स्थानीय नेतृत्व की राय को पूरी तरह नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। उन्होंने लिखा, “मेरे क्षेत्र में ऐसे लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिन्होंने कभी संगठन के लिए काम नहीं किया। यह पार्टी के भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं है।”
अजय मंडल ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें मुख्यमंत्री से मिलने नहीं दिया जा रहा। उन्होंने कहा, “जब समर्पित कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं की राय का कोई महत्व नहीं रह गया, तब पद पर बने रहने का कोई अर्थ नहीं है।”
इधर, जेडीयू विधायक गोपाल मंडल सोमवार को टिकट कटने की आशंका से नाराज़ होकर मुख्यमंत्री आवास के बाहर समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि उन्हें टिकट वितरण में जानबूझकर नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।
गोपाल मंडल ने मीडिया से कहा “मैं वर्षों से जनता दल (यू) का वफादार कार्यकर्ता रहा हूं। क्षेत्र में लगातार काम किया है। अगर टिकट देने में हमारी बात नहीं सुनी जाएगी, तो हम कार्यकर्ता कैसे प्रेरित रहेंगे?”
धरने की सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया। हालांकि, कुछ देर बाद स्थिति सामान्य हो गई।
जेडीयू में टिकट बंटवारे को लेकर खींचतान बढ़ती जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, कुर्था, दरभंगा, नबीनगर समेत कई क्षेत्रों के नेता और कार्यकर्ता भी नाराज़ हैं। पार्टी में जिन दावेदारों के टिकट कटे हैं, वे या उनके समर्थक मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचकर अपनी नाराज़गी जता रहे हैं।
एनडीए में सीट शेयरिंग पर सहमति बनने में पहले से ही देरी हो रही है। ऐसे में जेडीयू के भीतर इस तरह की कलह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए नई राजनीतिक चुनौती बन सकती है।
पार्टी की ओर से फिलहाल इन घटनाओं पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
