भोरे में नामांकन के दौरान भाकपा-माले नेता जितेन्द्र पासवान गिरफ्तार, पार्टी ने भाजपा-जदयू पर राजनीतिक साजिश का लगाया आरोप, दिव्या गौतम सहित अन्य उम्मीदवारों ने किया नामांकन

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

बिहार विधानसभा चुनाव के नामांकन चरण में बुधवार को भाकपा-माले (CPI-ML) के छह उम्मीदवारों ने अपने नामांकन दाखिल किए। लेकिन इसी दौरान भोरे विधानसभा सीट से पार्टी प्रत्याशी जितेन्द्र पासवान की गिरफ्तारी ने चुनावी माहौल को गर्मा दिया। पार्टी ने इसे भाजपा-जदयू गठबंधन की राजनीतिक साजिश करार दिया और पासवान की तुरंत रिहाई की मांग की।

भाकपा-माले के राज्य सचिव कुणाल ने कहा, “हमारे उम्मीदवारों को भाजपा-जदयू के दबाव में टारगेट किया जा रहा है। यह कार्रवाई हमारी पार्टी के नेताओं को डराने और चुनावी प्रतिस्पर्धा कमजोर करने की कोशिश है।”

इंडिया गठबंधन के समर्थन से भाकपा-माले के जिन उम्मीदवारों ने नामांकन किया, वे हैं:

फुलवारीशरीफ: गोपाल रविदास
दीघा: दिव्या गौतम
तरारी: मदन सिंह चंद्रवंशी
अगिआंव: शिवप्रकाश रंजन
डुमरांव: अजीत कुमार सिंह
भोरे: जितेन्द्र पासवान

पार्टी ने इन उम्मीदवारों के माध्यम से सामाजिक न्याय, गरीबों और पिछड़े वर्ग के अधिकार, महंगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का निर्णय लिया है।

भोरे में नामांकन के बाद जैसे ही जितेन्द्र पासवान निर्वाचन कार्यालय से बाहर निकले, पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पार्टी समर्थकों और कार्यकर्ताओं ने मौके पर विरोध प्रदर्शन किया।

पुलिस का कहना है कि पासवान के खिलाफ पुराने मामलों में वारंट जारी था, इसलिए उन्हें हिरासत में लिया गया। वहीं, भाकपा-माले इसे चुनावी रणनीति के तहत राजनीतिक दमन मान रही है।

पासवान 2020 विधानसभा चुनाव में लगभग 400 वोटों से हार चुके थे। इसके बाद, पार्टी का आरोप है कि उन पर लगातार मुकदमे दर्ज कर उन्हें परेशान किया गया।

प्रत्याशियों की पृष्ठभूमि

मदन सिंह चंद्रवंशी (तरारी): अति पिछड़े वर्ग के नेता, दलित और गरीब आंदोलनों में सक्रिय।

शिवप्रकाश रंजन (अगिआंव): छात्र और युवा आंदोलनों के नेता, 2024 उपचुनाव में विजयी।

अजीत कुमार सिंह (डुमरांव): निवर्तमान विधायक, जनता में लोकप्रिय, सामाजिक कार्यों में सक्रिय।

गोपाल रविदास (फुलवारीशरीफ): अनुभवी माले नेता, दलित और गरीब तबकों में मजबूत पकड़।

दिव्या गौतम (दीघा): पूर्व छात्र नेता, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय।

जितेन्द्र पासवान (भोरे): आरवाइए के राज्य अध्यक्ष, 2020 में हार के बावजूद लगातार संघर्षरत।

भाकपा-माले ने चेतावनी दी है कि अगर पासवान को तुरंत रिहा नहीं किया गया, तो पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। चुनावी प्रक्रिया के बीच यह घटना राज्य में राजनीतिक तनाव बढ़ा सकती है।

भाजपा-जदयू की ओर से इस मामले पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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