औराई विधानसभा में चंद्रशेखर आज़ाद का शक्ति प्रदर्शन — पहसौल व मटिहानी में ‍ आफताब आलम के समर्थन में उमड़ा जनसैलाब

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

मुज़फ्फरपुर जिले की औराई विधानसभा ने आज एक ऐतिहासिक नज़ारा देखा, जब आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद चंद्रशेखर आज़ाद के नेतृत्व में लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा।
आज़ाद समाज पार्टी के उम्मीदवार आफ़ताब आलम के समर्थन में आयोजित दो बड़े जनसभाओं — पहसौल बाज़ार और मटिहानी हाई स्कूल मैदान — में दलित, मुस्लिम और अन्य पिछड़े तबकों के तीस हज़ार से अधिक लोगों की भारी भागीदारी ने इलाके की सियासी हवा का रुख बदल दिया।

सभा को संबोधित करते हुए चंद्रशेखर आज़ाद ने मौजूदा व्यवस्था पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा “देश को आज़ाद हुए बरसों बीत गए, लेकिन हम अब भी झूठी आज़ादी में जी रहे हैं। हमारे दलित भाई मंदिर जाने पर पीटे जाते हैं, बारात में घोड़ी पर चढ़ने से रोके जाते हैं, पाँच साल की बच्चियों के साथ दरिंदगी होती है। हमें राजनीतिक और आर्थिक रूप से कमज़ोर रखने की साज़िश जारी है। लेकिन अब समाज जाग चुका है और भीम आर्मी व आज़ाद समाज पार्टी के झंडे तले अपने पूरे अधिकारों की लड़ाई लड़ने निकला है।”

चंद्रशेखर आज़ाद ने दलित–मुस्लिम एकता की अहमियत पर ज़ोर देते हुए कहा “जैसे नगिना में दलितों के साथ मुस्लिम समाज ने कंधे से कंधा मिलाकर मेरा साथ दिया और मुझे संसद तक पहुँचाया, वैसे ही बिहार की धरती अब वही इतिहास दोहराने को तैयार है। औराई से यह संदेश जाना चाहिए कि जब दलित और मुसलमान एक होते हैं, तो सत्ता की दीवारें हिल जाती हैं।
आफ़ताब आलम को जिताकर हम एक नई राजनीति की शुरुआत करेंगे ऐसी राजनीति जो सम्मान, सुरक्षा और विकास की बात करे, न कि नफ़रत और बँटवारे की।”

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जौहर आज़ाद और भीम आर्मी बिहार के अध्यक्ष अमर ज्योति ने कहा “बिहार में दलितों और मुसलमानों की आवाज़ को वर्षों से हाशिए पर धकेला गया है। अब समय आ गया है कि ये दोनों वंचित तबके एकजुट होकर अपनी राजनीतिक ताक़त का एहसास कराएँ।
आफ़ताब आलम वह नेता हैं जिन्होंने दलित बस्तियों पर बुलडोज़र कार्रवाई, दलित बच्चियों के साथ अत्याचार, और मुस्लिम क़ब्रिस्तानों पर कब्ज़े की साज़िशों के ख़िलाफ़ ज़मीनी संघर्ष किया है। ऐसे जुझारू और जनसरोकार वाले नेता को विधानसभा भेजना ही असली बदलाव की राह है।”

भीम आर्मी के राष्ट्रीय महासचिव कमल सिंह वालिया ने जोशीले अंदाज़ में कहा “मैं कई दिनों से औराई में हूँ और यहां के जनमानस में उठती जागरूकता की लहर को अपनी आँखों से देखा है। दलितों की चेतना और मुसलमानों की एकजुटता अब एक नया इतिहास लिखने जा रही है।
यह सीट हम जीत रहे हैं बस अब आख़िरी दिनों में हर घर, हर गली तक पहुँचना है और 6 नवम्बर की शाम तक पूरी ताक़त झोंक देनी है।”

सभा में उपस्थित उम्मीदवार आफ़ताब आलम ने भावुक शब्दों में जनता को संबोधित करते हुए कहा ।“2020 के चुनाव में जिन मुद्दों को मैंने अपना एजेंडा बनाया था, उन्हीं पर मैं पिछले पाँच साल लगातार ज़मीन पर रहकर लड़ता रहा हूँ। चाहे दलित हों, मुसलमान हों, यादव हों या अन्य पिछड़े समाज ,मैं हर अन्याय के खिलाफ़ खड़ा रहा।
अगर कभी मेरी कोशिश में कोई कमी रह गई हो, तो मैं दिल से माफ़ी चाहता हूँ। लेकिन आज मैं आप सबसे वादा करता हूँ कि विधानसभा में पहुँचकर आपके अधिकारों के लिए निडर संघर्ष करूँगा।”

इस अवसर पर आज़ाद समाज पार्टी के प्रदेश सचिव शरफ़ुद्दीन क़ासमी, ज़िला अध्यक्ष रामनरेश पासवान, तथा अनेक वरिष्ठ नेताओं ने भी संबोधन किया और अपील की कि आफ़ताब आलम को विजयी बनाकर बिहार में एक नई जनराजनीति की नींव रखी जाए।

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