कश्मीर में दर्दनाक मोड़: लाल किला धमाके के संदिग्ध बेटे की गिरफ्तारी के बाद खाजिगुंड फल विक्रेता ने आत्मदाह किया

कश्मीर के खाजिगुंड (अनंतनाग) में रविवार को एक दुखद घटना हुई, जब स्थानीय ड्राय फ्रूट विक्रेता बिलाल अहमद वानी ने आत्मदाह कर लिया। उन्हें गंभीर जलन के साथ अनंतनाग अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन सोमवार को उनकी मौत हो गई। घटना उस समय सामने आई, जब उनके बेटे जिसिर बिलाल वानी, जिन्हें दानिश के नाम से भी जाना जाता है, को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 10 नवंबर के लाल किला कार ब्लास्ट मामले में गिरफ्तार किया।

परिवार का कहना है कि बिलाल वानी अपने बेटे और भाई की हिरासत के कारण मानसिक रूप से बेहद परेशान थे। वे लगातार उनसे मिलने की अनुमति मांग रहे थे, लेकिन उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं। इस हताशा में उन्होंने घर के आंगन में पेट्रोल डालकर खुद को आग लगा ली। उन्हें पहले अनंतनाग अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण उन्हें श्रीनगर के SMHS अस्पताल स्थानांतरित किया गया। डॉक्टरों के अनुसार, उन्हें 80-90 प्रतिशत तक गंभीर जलन थी।

पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह हिरासत में लिए गए परिवार के प्रति “उच्च हाथपाई” और “अवमानना” का परिणाम है, जिसने वानी को हताशा और निराशा में धकेल दिया।

इस बीच, NIA ने जसिर बिलाल वानी को श्रीनगर से गिरफ्तार किया। एजेंसी के अनुसार, उसे लाल किला कार ब्लास्ट मामले में “सक्रिय सह-साजिशकर्ता” के रूप में नामजद किया गया है। जसिर पर आरोप है कि उसने ड्रोन मॉडिफाई करने और रॉकेट बनाने में तकनीकी सहायता प्रदान की। NIA ने कहा कि वह आत्मघाती हमलावर डॉ. उमर उन नबी के करीबी सहयोगी थे और हमले की तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जांच एजेंसी का मानना है कि जसिर का नेटवर्क सिर्फ कश्मीर तक सीमित नहीं था, बल्कि हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ था। NIA अब कई राज्यों में तलाशी अभियान चला रही है और संदिग्धों की पहचान और पूछताछ कर रही है। एजेंसी का कहना है कि यह गिरफ्तारी लाल किला धमाके की गहन जांच और पूरे नेटवर्क को उजागर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह मामला सिर्फ आतंकवादी घटना का नहीं, बल्कि एक परिवार की त्रासदी भी है। जहां एक पिता बच्चों की हिरासत और हताशा के चलते आत्मदाह कर बैठा, वहीं बेटा कथित आतंकवादी साजिश में गिरफ्तार हुआ। कश्मीर की समाज-राजनीति में यह घटनाक्रम संवेदनशील सवाल खड़ा करता है, कि सुरक्षा और जांच के साथ-साथ मानवीय दृष्टिकोण भी समान रूप से जरूरी है।

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