रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को एक बड़ा राजनीतिक बयान देते हुए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर आरोप लगाया है कि वे बाबरी मस्जिद का निर्माण सरकारी धन से करवाना चाहते थे। उन्होंने कहा कि उस समय तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया था, क्योंकि वे सच्चे अर्थों में धर्मनिरपेक्ष थे और किसी तरह के तुष्टीकरण में विश्वास नहीं करते थे।
यह बयान सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के तहत MY भारत द्वारा आयोजित ‘एकता मार्च’ के बाद हुए ‘सरदार सभा’ कार्यक्रम में दिया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने दावा किया कि नेहरू ने पहले भी सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण पर सवाल उठाए थे। लेकिन सरदार पटेल ने स्पष्ट किया था कि सोमनाथ मंदिर जनता के आर्थिक योगदान से बनाया जा रहा है, न कि सरकारी धन से।
उन्होंने कहा “सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण जनता के दान से हुआ था। उस समय 30 लाख रुपये लोगों ने दिए थे, एक ट्रस्ट बना था और सरकारी खजाने से एक भी रुपया खर्च नहीं किया गया था।”
सिंह ने यह भी कहा कि अयोध्या में बन रहे राम मंदिर के निर्माण में भी सरकारी पैसों का उपयोग नहीं किया गया है, बल्कि देश की जनता ने इसके लिए आर्थिक योगदान दिया है।
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में 25 नवंबर को अयोध्या में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 22 फुट का धार्मिक झंडा फहराने की परंपरा ‘ध्वजा आरोहण’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह अनुष्ठान धर्म की अधर्म पर जीत का प्रतीक है और दुनिया भर में हिंदू समुदाय के लिए धार्मिक महत्व रखता है।
इस कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया, केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सरदार पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि “सरदार पटेल ने अपनी दूरदर्शिता, दृढ़ इच्छाशक्ति और अदम्य संकल्प के जरिए एकीकृत भारत का सपना साकार किया।”
