कोलकाता कर जादवपुर यूनिवर्सिटी (JU) के 68वें वार्षिक दीक्षांत समारोह के दौरान बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जब दो छात्रों ने मंच पर “No space for Islamophobia in JU” (जादवपुर यूनिवर्सिटी में इस्लामोफोबिया के लिए कोई जगह नहीं) लिखा पोस्टर प्रदर्शित किया और धर्म‑आधारित भेदभाव के खिलाफ विरोध जताया। यह प्रदर्शन वहीं हुआ जब छात्र अपना स्नातक की डिग्री ग्रहण कर रहे थे।
यह विरोध उसी हिजाब विवाद से जुड़ा था, जो विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग में सोमवार को आयोजित एक परीक्षा के दौरान हुआ। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा‑प्रवर्तन के दौरान प्रोफेसर ने दो मुस्लिम महिला छात्रों से हिजाब हटाने को कहा, यह जांचने के लिए कि उनके हिजाब के नीचे कोई वायरलेस हेडफोन तो नहीं है। छात्रों का कहना है कि यह कार्रवाई धार्मिक भेदभाव के समान है और इससे उनकी परीक्षा पर भी असर पड़ा।
मामले की शिकायत छात्रों ने विश्वविद्यालय के कुलपति चिरंजीब भट्टाचर्य को लिखित पत्र के रूप में की। शिकायत में कहा गया कि एक छात्रा को कक्षा में ही पुरुष छात्रों की मौजूदगी में हिजाब हटाने के लिए कहा गया, जबकि दूसरी छात्रा को अलग कमरे में बुलाकर ऐसा करने को कहा गया। छात्रों ने आरोप लगाया कि उनसे उनके धर्म और हिजाब पहनने के कारण सवाल पूछे गए, जिससे उन्हें असहज और अपमानित महसूस हुआ।
छात्रों ने पत्र में लिखा है कि ऐसा व्यवहार विश्वविद्यालय के मूल्यों – सहिष्णुता और समानता – के खिलाफ है। उन्होंने यह भी मांग की कि विश्वविद्यालय इस मामले की गंभीरता से जांच करे और आगे से किसी भी छात्र के साथ धार्मिक या सांस्कृतिक कारणों से भेदभाव न हो।
इस विवाद पर बातचीत करते हुए अंतर्राष्ट्रीय संबंध विभाग के छात्र जाहिद खान ने कहा कि छात्राओं को पुरुष छात्रों की नजरों के सामने हिजाब हटाने के लिए मजबूर किया गया, और जब किसी ने इसका विरोध किया तो उन्हें अलग कमरे में ले जाया गया, जहां उनसे उनके धार्मिक निर्णयों के बारे में सवाल किए गए।
दूसरी ओर, अंग्रेजी विभाग के शिक्षक इस आरोप का खंडन कर रहे हैं। उनका कहना है कि परीक्षा‑सुरक्षा कारणों से निरीक्षण किया गया था, क्योंकि हाल ही में छात्रों द्वारा हेडफोन का उपयोग करते हुए नकल करने के कई मामले सामने आए थे। उन्होंने कहा कि विभिन्न पृष्ठभूमि के कई छात्रों की जांच की गई और यह किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं था।
एक वरिष्ठ प्रोफेसर ने कहा कि इस तरह के आरोप और पोस्टर से शिक्षण कार्य प्रभावित हो सकता है, क्योंकि यह अध्यापकों के प्रति अनावश्यक रूप से धार्मिक पक्षपात के आरोप लगाता है। उनके अनुसार कुछ अन्य हिजाब पहने छात्रों को भी जांच से नहीं गुजरना पड़ा।
कुलपति भट्टाचर्य ने बताया कि उन्होंने छात्रों की शिकायत प्राप्त कर ली है और मामले की जांच की जा रही है। विश्वविद्यालय के भीतर छात्रों और शिक्षकों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें भी आयोजित की जा सकती हैं, ताकि विवाद को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से सुलझाया जा सके।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब भारत के कई विश्वविद्यालयों में धार्मिक पहचान, स्वतंत्रता और संवेदनशीलता से जुड़े मसले शिक्षा जगत में गर्म बहस का विषय बने हुए हैं। जादवपुर यूनिवर्सिटी, जो अपने उदार और धर्म‑निरपेक्ष मंच के लिए जानी जाती है, अब ऐसे विवाद के केंद्र में आ गई है जिसने छात्रों और शिक्षकों के बीच गहरी चर्चा की लहर पैदा कर दी है।
