कड़ाके की ठंड के बीच दलित और गरीब परिवारों के घरों पर चलाए जा रहे बुलडोजर एक्शन के खिलाफ बिहार में व्यापक विरोध देखने को मिला। अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) और अन्य खेत मजदूर संगठनों के आह्वान पर 5 और 6 जनवरी को राज्य के 200 से अधिक अंचलों में जुझारू प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने बुलडोजर कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने, वर्षों से बसी दलित बस्तियों का सर्वे कराने और पर्चा/पट्टा देने की मांग की।
भाकपा (माले) से संबद्ध खेग्रामस और मनरेगा मजदूर सभा के हजारों कार्यकर्ता इन प्रदर्शनों में शामिल हुए। पटना जिले के बिक्रम अंचल में आंदोलन का नेतृत्व करते हुए खेग्रामस के राष्ट्रीय महासचिव धीरेंद्र झा ने कहा कि आज़ादी के बाद बिहार पहला राज्य था जिसने 1948 में पीपीएच एक्ट बनाकर दर-रैयत और मजदूरों को आवासीय भूमि का अधिकार दिया, लेकिन आज भी लगभग 30 प्रतिशत आबादी आवासीय भूमिहीन है। उन्होंने इसे गरीब-पक्षीय कानूनों के ईमानदार क्रियान्वयन की विफलता बताया।
धीरेंद्र झा ने मांग की कि जहां-जहां लोग वर्षों से बसे हुए हैं, वहां समुचित सर्वे कराकर उन्हें पर्चा/पट्टा दिया जाए। साथ ही विकास परियोजनाओं के नाम पर विस्थापित परिवारों के लिए पंचायतों और शहरी वार्डों में मजदूर कॉलोनियां बसाने की मांग की। उन्होंने ऐलान किया कि आगामी बजट सत्र में गांवों के दलित गरीबों का जुझारू विधानसभा घेराव किया जाएगा। इस दौरान मनरेगा के पूर्ण क्रियान्वयन और चार श्रम संहिताओं को रद्द करने की मांग भी उठी।
सिवान जिले के दरौली अंचल में आंदोलन का नेतृत्व करते हुए खेग्रामस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक सत्यदेव राम ने आरोप लगाया कि सरकार अदानी-अंबानी जैसे बड़े कॉरपोरेट घरानों को जमीन देने के लिए गरीबों को उजाड़ रही है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री को सदन में घेरा जा चुका है और अब सड़कों पर भी निर्णायक घेराबंदी की जाएगी। उनका कहना था कि भाजपा को भूमि सुधार सौंप देने से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नहीं बच पाएंगे।
खेग्रामस के राज्य सचिव शत्रुघ्न सहनी ने बताया कि राज्य के अधिकांश अंचलों में जोरदार प्रदर्शन हुए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि दलित गरीबों के वास-आवास पर बुलडोजर राज नहीं चलने दिया जाएगा और यदि कार्रवाई नहीं रुकी तो निर्णायक आंदोलन छेड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि बुलडोजर अभियान ने पैसे देकर महिलाओं का वोट खरीदने की सच्चाई को उजागर कर दिया है। प्रदर्शनों में महिलाओं की बड़ी भागीदारी देखी गई।
पालीगंज और दुल्हिन बाजार में आंदोलन की अगुवाई युवा विधायक संदीप सौरभ ने की। उन्होंने कहा कि दशकों से बसी दलित बस्तियों को नियमित न करना न्याय और विकास—दोनों पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने मुशहर/भुईयां बस्तियों सहित सभी दलित बस्तियों को नियमित करने की मांग की।
राज्यभर में हुए प्रदर्शनों का नेतृत्व विभिन्न जिलों में गोपाल रविदास, बिरेंद्र गुप्ता, उपेंद्र पासवान, प्रदीप कुमार सहित अन्य नेताओं ने किया। खेग्रामस ने साफ किया कि यदि सरकार ने बुलडोजर कार्रवाई नहीं रोकी और दलित-गरीबों को आवासीय अधिकार नहीं दिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
