इंदौर जल संकट के बीच RSS बैठक में अफसरों की मौजूदगी पर SDPI का तीखा हमला, स्वतंत्र जांच की मांग

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) ने इंदौर में पानी की गंभीर दूषित आपूर्ति के संकट के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की कथित बंद कमरे की बैठक में जिला प्रशासन और नगर निगम के शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। SDPI के राष्ट्रीय महासचिव पी. अब्दुल मजीद फैज़ी ने इसे “संवैधानिक जिम्मेदारियों पर वैचारिक निष्ठा को तरजीह देने” का उदाहरण बताया है।

SDPI के मुताबिक, 7 जनवरी 2026 को इंदौर के जिला कलेक्टर शिवम वर्मा और मेयर पुष्यमित्र भार्गव की RSS कार्यालय में आयोजित बैठक में भागीदारी उस वक्त हुई, जब शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में पानी की भीषण दूषित आपूर्ति से जनस्वास्थ्य संकट गहराता जा रहा था। पार्टी ने आरोप लगाया कि यह घटना भाजपा शासित मध्य प्रदेश में प्रशासन पर RSS के “गहरे और चिंताजनक प्रभाव” को उजागर करती है।

पार्टी ने कहा कि इस जल संकट की गंभीरता बेहद भयावह है। दूषित नल के पानी के कारण अब तक कम से कम आठ लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि मुआवजा 18 परिवारों को दिए जाने की बात सामने आई है, जिससे मृतकों की वास्तविक संख्या और अधिक होने की आशंका जताई जा रही है। 446 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती कराए गए, जिनमें कई की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है। SDPI का आरोप है कि यह त्रासदी प्रदूषण की पहचान में देरी, इंदौर नगर निगम और जिला प्रशासन के बीच समन्वय की कमी तथा जनता को समय पर सूचना न देने जैसी प्रशासनिक विफलताओं का नतीजा है।

इसी पृष्ठभूमि में RSS कार्यालय में लंबी बैठक में वरिष्ठ सिविल और निर्वाचित अधिकारियों की भागीदारी पर सवाल उठाते हुए SDPI ने कहा कि स्वास्थ्य आपातकाल के समय इस तरह की बैठक को सामान्य या औपचारिक नहीं माना जा सकता। पार्टी का दावा है कि इस बैठक में प्रदूषण के कारणों, प्रशासनिक खामियों और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई, जिससे शासन की निष्पक्षता पर जनता का भरोसा और कमजोर होता है।

SDPI ने यह भी याद दिलाया कि भले ही 2024 में भाजपा सरकार ने सरकारी कर्मचारियों पर RSS से जुड़ाव संबंधी प्रतिबंध हटा दिया हो, लेकिन ऐसी गतिविधियां अखिल भारतीय सेवा आचरण नियम, 1968 की भावना के खिलाफ हैं, जो प्रशासनिक निष्पक्षता और राजनीतिक तटस्थता की मांग करता है। पार्टी ने चेतावनी दी कि इस तरह का जुड़ाव संवैधानिक मूल्यों और धर्मनिरपेक्ष शासन को कमजोर करता है।

भाजपा की ओर से इसे “सिर्फ एक शिष्टाचार भेंट” बताए जाने को SDPI ने प्रभावित नागरिकों के प्रति असंवेदनशील करार दिया। पार्टी का आरोप है कि सत्तारूढ़ दल जवाबदेही तय करने के बजाय वैचारिक हस्तक्षेप को बचाने की कोशिश कर रहा है।

SDPI ने RSS बैठक की तत्काल स्वतंत्र जांच, जल प्रदूषण संकट के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और सभी प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजे की मांग की है। पार्टी ने कहा कि वह इंदौर की जनता के साथ मजबूती से खड़ी है और किसी भी विचारधारा को मानव जीवन और लोकतांत्रिक मूल्यों से ऊपर नहीं रखा जा सकता।

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