बिहार विधानसभा चुनाव में जनता दल यूनाइटेड (JDU) की जोरदार जीत के बाद पार्टी में पुराने नेताओं की वापसी की चर्चाएँ तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में पूर्व केंद्रीय मंत्री और जन सुराज पार्टी के नेता आरसीपी सिंह की JDU में वापसी को लेकर अटकलें बढ़ रही हैं।
पटना में पत्रकारों से बातचीत में आरसीपी सिंह ने कहा, “खरमास खत्म होने का इंतजार कीजिए, उसके बाद पता चलेगा।” उन्होंने यह भी साफ किया कि उनके और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच रिश्ते में कोई दूरी नहीं है।
दरअसल, हाल ही में पटेल परिवार की ओर से पटना में चूड़ा-दही भोज का आयोजन किया गया था, जिसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह दोनों शामिल हुए। हालांकि दोनों की औपचारिक मुलाकात नहीं हुई, लेकिन आरसीपी सिंह ने मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री की तारीफ की और कहा कि बिहार के लोग नीतीश कुमार को पसंद करते हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें पटेल समाज ने आमंत्रित किया था, इसलिए वे कार्यक्रम में पहुंचे।
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह JDU में लौटेंगे, तो आरसीपी सिंह ने कहा “हम दो नहीं हैं। हम 25 वर्षों से साथ रहे हैं। नीतीश कुमार और मैं एक-दूसरे को बेहतर जानते हैं। खरमास के बाद जो फैसला होगा, वह पता चल जाएगा।”
इस पर JDU प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा “पार्टी में वापसी का फैसला राष्ट्रीय नेतृत्व करेगा। लेकिन इतना साफ है कि नीतीश कुमार का व्यक्तित्व इतना प्रभावशाली है कि संकट के समय हर कोई उनके साथ होना चाहता है।”
67 वर्षीय आरसीपी सिंह पूर्व IAS अधिकारी रह चुके हैं और नीतीश कुमार ने उन्हें राजनीति में मार्गदर्शन दिया। JDU में उन्होंने संगठन महासचिव और राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद संभाले। राज्यसभा सांसद और केंद्रीय मंत्री रह चुके आरसीपी सिंह ने बाद में नीतीश कुमार से मतभेद के कारण पार्टी छोड़ दी थी। इसके बाद वह बीजेपी में भी गए और फिर अपनी पार्टी बनाई, जिसे उन्होंने हाल ही में जन सुराज पार्टी में विलय कर दिया।
बिहार विधानसभा चुनाव में आरसीपी सिंह की बेटी लता सिंह को नालंदा की अस्थावां सीट से जन सुराज पार्टी ने उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। लता सिंह 15,962 वोट लेकर तीसरे नंबर पर रहीं, जबकि JDU के जितेंद्र कुमार 90,542 वोट लेकर विजयी हुए।
अब सबकी नजरें JDU और आरसीपी सिंह के संबंधों पर टिकी हैं। खरमास खत्म होने के बाद क्या आरसीपी सिंह फिर से नीतीश कुमार के साथ JDU में लौटेंगे, यह राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
