अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) और मनरेगा मजदूर सभा के शीर्ष नेताओं ने पटना में एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में राज्यभर में दलित-गरीब बस्तियों पर चल रही बुलडोजर कार्रवाई और मनरेगा योजनाओं के कमजोर किए जाने के खिलाफ चल रहे आंदोलनों की समीक्षा की गई।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि 2 फरवरी 2026 को पटना में दलित, गरीब, मजदूर और महिलाओं का राज्य स्तरीय कंवेंशन आयोजित किया जाएगा। इसमें मुख्यमंत्री की आगामी यात्रा के दौरान इन सभी मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया जाएगा। संगठन ने मुख्यमंत्री को पत्र सौंपकर राज्य में दलित एवं वंचित जातियों की आवासीय भूमिहीनता दूर करने और सभी अनधिकृत बसावटों का समग्र सर्वे कराने की मांग की है।
नेताओं ने कहा कि मनरेगा को खत्म करने की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही थी और अब इसे लगभग समाप्त कर दिया गया है। साथ ही उन्होंने “ग्रामजी कानून” की आलोचना करते हुए कहा कि इसके जरिए संवैधानिक रोजगार गारंटी को कमजोर किया गया है, जिससे पहले से जर्जर राज्य की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
बैठक में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की वापसी की भी कड़ी निंदा की गई। इसके अलावा संगठन ने रैदास स्मृति सप्ताह मनाने का भी निर्णय लिया।
बैठक में खेग्रामस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक सत्यदेव राम, राष्ट्रीय महासचिव धीरेंद्र झा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महबूब आलम, राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व विधायक गोपाल रविदास, मदन चंद्रवंशी, उपेंद्र पासवान, सत्यनारायण प्रसाद, सुभाष पटेल, मुखिया प्रदीप कुमार, जितेंद्र कुमार, प्रदीप कुशवाहा, चंद्रदेव वर्मा सहित अन्य नेता मौजूद थे। बैठक की अध्यक्षता राज्य सचिव शत्रुघ्न सहनी ने की।
