“Bihar से Gulf और अन्य देशों के लिए डायरेक्ट फ्लाइट का आंदोलन तेज, Eurasia Chamber of Commerce ने जताया समर्थन; प्रतिनिधि दल जल्द सरकार से करेगा मुलाकात”

देश का तीसरा सबसे जनसंख्या वाला राज्य, बिहार, आज भी डायरेक्ट अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की कमी के कारण संघर्ष कर रहा है। लगभग 14 करोड़ की आबादी वाले इस राज्य से अभी तक कोई नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ान उपलब्ध नहीं है।

इस कारण हजारों बिहारी प्रवासी और उनके परिवार 15–20 घंटे लंबी और थकाऊ यात्रा करने को मजबूर हैं। यह मुद्दा केवल सुविधा का नहीं है, बल्कि समय, स्वास्थ्य, गरिमा और परिवार की मजबूरी से जुड़ा हुआ है।

इस लिए अब इस को लेकर बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू हो गया है, सिवान के निवासी रफ़ीक़ अहमद, जो पिछले 14 साल से गल्फ देशों में कार्यरत हैं, इस आंदोलन के नेतृत्वकर्ताओं में से सक्रिय व्यक्ति हैं। रफ़ीक़ कहते हैं, “यह अभियान मेरी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि लाखों बिहारी प्रवासियों की साझा आवाज़ है।”

रफ़ीक़ ने 2014 में पहली बार बिहार से डायरेक्ट इंटरनेशनल फ्लाइट की आवश्यकता पर लिखना शुरू किया। उन्होंने RTI (सूचना का अधिकार) के माध्यम से यह जानने की कोशिश की कि बिहार से कितने लोग विदेशों में कार्यरत हैं और राज्य की अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी नीति क्या है। लेकिन स्पष्ट आंकड़े या ठोस जवाब नहीं मिला।

रफीक का कहना है कि “गल्फ देशों में बिहार के लगभग 40 लाख लोग स्थायी या नियमित रूप से यात्रा करने वाले प्रवासी हैं। यदि बिहार से डायरेक्ट फ्लाइट शुरू होती है, तो इन्हें सीधी और सुविधाजनक कनेक्टिविटी मिलेगी,ये प्रवासी न केवल अपने परिवारों का सहारा हैं, बल्कि रेमिटेंस के जरिए भारतीय अर्थव्यवस्था में अरबों रुपये का योगदान भी करते हैं”।

इस आंदोलन में सक्रिय एक्टिविस्ट मेराज खान कहते हैं कि “यह बहस केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है। असली सवाल यह है कि इतने बड़े प्रवासी समुदाय वाले राज्य को क्यों वंचित रखा गया है?”

मालूम हो कि बिहार से डायरेक्ट फ्लाइट न होने के कारण प्रवासियों को पहले दिल्ली, मुंबई, कोलकाता या हैदराबाद तक पहुंचना पड़ता है। पूरा सफर कई बार 15–20 घंटे या उससे अधिक का हो जाता है। लंबा इंतजार, भीड़, अतिरिक्त खर्च और थकान आम हैं। यह केवल सुविधा का सवाल नहीं। यह स्वास्थ्य, समय, सम्मान और मानवीय गरिमा का सवाल है।

हाल के महीनों में सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को जोर देकर उठाया गया। देखते ही देखते यह अभियान एक व्यक्ति की पहल से लाखों लोगों की साझा मांग बन गया है। गल्फ देशों में बसे बिहारी और उनके परिवार सीधे इस आंदोलन से जुड़े हैं। सऊदी अरब, दुबई, क़तर, ओमान, कुवैत और बहरीन में सक्रिय बिहारी संगठन खुलकर समर्थन कर रहे हैं।

अभियान की मुख्य मांगें

1.बिहार से सप्ताह में कम से कम 1–2 डायरेक्ट इंटरनेशनल फ्लाइट।

2.प्राथमिकता गल्फ देशों को दी जाए।

3.बिहटा एयरपोर्ट या अन्य वैकल्पिक स्थलों पर सटीक योजना और समयबद्ध नीति बनाई जाए।

अभियान समर्थक कहते हैं कि यदि छोटे राज्यों और शहरों से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संभव हैं, तो बिहार जैसे बड़े और श्रमप्रधान राज्य को वंचित रखना अनुचित है।

राज्यसभा में चर्चा के दौरान केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ने कहा है कि “पटना हवाई अड्डा तकनीकी रूप से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए तैयार है, लेकिन उड़ानें तभी शुरू होंगी जब यह एयरलाइंस के लिए आर्थिक रूप से व्यवहार्य साबित हों”।

सांसद डॉ. भीम सिंह ने कहा कि बिहार से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की शुरुआत न केवल सुविधा बढ़ाएगी, बल्कि व्यापार, पर्यटन और निवेश को भी बढ़ावा देगी।

18 देशों के अंतरराष्ट्रीय मार्ग प्रस्तावित हैं, जिनमें UAE, सऊदी अरब, क़तर, नेपाल, थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर और बांग्लादेश शामिल हैं। यह पहल UDAN अंतरराष्ट्रीय योजना के तहत है, जिसका उद्देश्य टियर-2 शहरों और बड़े राज्यों में हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाना है।

इस मामले में अब अंतरराष्ट्रीय समर्थन भी सामने आया है। Eurasia Chamber of Commerce and Industry के अध्यक्ष ने इंसाफ टाइम्स से बातचीत में कहा “हम इस मामले को लेकर चिंतित हैं और भारत सरकार से अनुरोध करते हैं कि बिहार से गल्फ देशों के लिए डायरेक्ट फ्लाइट सुनिश्चित की जाए, ताकि लाखों लोगों को सुविधा मिल सके और वे देश की आर्थिक सशक्तिकरण में योगदान दे सकें। इसके साथ ही बिहार से अन्य अंतरराष्ट्रीय क्षेत्रों के लिए भी डायरेक्ट फ्लाइट शुरू की जानी चाहिए, जहां बिहारी नागरिक शिक्षा और नौकरी के लिए रहते हैं।”

अध्यक्ष ने बताया कि Eurasia Chamber की टीम फरवरी में Ministry of Civil Aviation और बिहार के CMO से मुलाकात करेगी, साथ ही IndiGo एयरलाइन के प्रतिनिधियों से भी बैठक होगी।

उन्होंने आगे कहा “विशेष रूप से डायरेक्ट फ्लाइट की आवश्यकता और NRIs के अन्य मुद्दों को लेकर अप्रैल में हमारा एक प्रतिनिधि दल गल्फ देशों का दौरा करेगा, जहां भारतीय संगठनों, व्यक्तियों और दूतावास से मिलकर सभी संबंधित मुद्दों को समझा जाएगा और समाधान के लिए भारत सरकार और अन्य संबंधित संस्थाओं के साथ समन्वय किया जाएगा।”

Eurasia Chamber ने गल्फ में बसे NRIs से भी अपील की है कि वे संपर्क करें और सहयोग दें, ताकि डायरेक्ट फ्लाइट जल्दी सुनिश्चित की जा सके।

संपर्क विवरण
ईमेल: info@eecci.org
WhatsApp: 7047947406

पटना हवाई अड्डे में हाल के वर्षों में लंबी रनवे, आधुनिक टर्मिनल और सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। AAI ने कई चरणों में आधुनिकीकरण पूरा कर लिया है। अब एयरलाइंस को अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

गल्फ में रहने वाले कहते हैं कि “बिहार केवल जनसंख्या का आंकड़ा नहीं है। यह मगध—लोकतंत्र की जन्मभूमि, यह नालंदा—विश्व प्रसिद्ध शिक्षा केंद्र और यह भगवान बुद्ध व महावीर की भूमि है,आज वही धरती, वैश्विक कनेक्टिविटी की कमी के कारण सुविधाओं और अवसरों में पिछड़ रही है।

बिहार से डायरेक्ट इंटरनेशनल फ्लाइट की मांग अब स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर मुद्दा बन चुकी है!जन-आंदोलन, राजनीतिक समर्थन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के साथ, उम्मीद है कि जल्द ही बिहार का नाम वैश्विक हवाई नक्शे पर दिखाई देगा। रफ़ीक़ अहमद कहते हैं, “यह लड़ाई किसी सरकार या व्यक्ति के खिलाफ नहीं है। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए है, ताकि उन्हें वही संघर्ष न झेलना पड़े जो आज लाखों बिहारी परिवार झेल रहे हैं।”

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