वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की 2017 की हत्या के आरोपित श्रीकांत पांगर्कर ने महाराष्ट्र के जालना नगर निगम चुनाव में वॉर्ड‑13 से स्वतंत्र प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल की। इस चुनाव परिणाम ने देशभर में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीव्र बहस छेड़ दी है।
नगरपालिका चुनाव की मतगणना में पांगर्कर ने कुल 2,661 वोट प्राप्त किए, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा के रावसाहेब ढोबले को 2,477 वोट मिले। इस प्रकार पांगर्कर ने 184 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।
निर्णय घोषित होते ही पांगर्कर ने अपने समर्थकों के साथ जीत का जश्न मनाया। उनके जुलूस और उत्सव की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इस जीत ने मीडिया, नागरिक समूहों और राजनीतिक हलकों में भारी आलोचना और चिंता को जन्म दिया है।
गौरी लंकेश, जो एक प्रमुख पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता थीं, को 5 सितंबर 2017 को उनके बेंगलुरु स्थित घर के बाहर गोली मार दी गई थी। इस हत्या ने देशभर में सूचना की स्वतंत्रता और राजनीतिक असहमति को लेकर व्यापक आक्रोश पैदा किया।
पांगर्कर आरोपितों में से एक हैं और मामला अभी भी न्यायालय में लंबित है। उन्हें कर्नाटक उच्च न्यायालय से जमानत सितंबर 2024 में मिली थी, लेकिन आरोप उन पर बरकरार हैं।
श्रीयंत पांगर्कर पहले अखंड शिवसेना के तहत जलना नगर परिषद के सदस्य रह चुके हैं। बाद में उन्हें 2011 में पार्टी टिकट नहीं मिलने पर हिंदू जनजागृति समिति से जुड़ना पड़ा। 2024 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के समय उन्होंने शिवसेना (शिंदे नेतृत्व) में प्रवेश किया था, लेकिन आलोचना के चलते पार्टी नेतृत्व ने उनकी नियुक्ति रद्द कर दी थी।
इसके अलावा 2018 में पांगर्कर नलासोपाड़ा हथियार बरामदगी मामले में भी शामिल पाए गए थे और उन पर विभिन्न कानूनों के तहत मामले दर्ज हुए थे!
विश्लेषकों और मानवाधिकार समूहों का कहना है कि आरोपित व्यक्तियों का चुनाव जीतना लोकतांत्रिक मूल्यों और न्याय प्रणाली पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। उनका तर्क है कि इससे न्याय की प्रक्रिया और लोकतांत्रिक आस्था पर असर पड़ सकता है। हालांकि पांगर्कर और उनके समर्थक दावा करते हैं कि अभी तक कोई दोषसिद्धि नहीं हुई है और उन्हें निर्दोष मानते हुए वोट दिया गया।
