तेलंगाना : पत्रकारों की गिरफ्तारी से मची हलचल, प्रेस की स्वतंत्रता पर उठे सवाल

तेलंगाना पुलिस द्वारा दो वरिष्ठ पत्रकारों को मानहानि के आरोप में गिरफ्तार किए जाने से राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया और प्रेस की स्वतंत्रता पर व्यापक बहस छिड़ गई है। पुलिस ने तेलुगु समाचार चैनल एनटीवी के इनपुट संपादक दोंथु रमेश और संवाददाता सुदीर को गिरफ्तार किया। इन पर आरोप है कि उन्होंने एक महिला आईएएस अधिकारी और राज्य मंत्री के विरुद्ध झूठा और अपमानजनक प्रसारण किया।

तेलंगाना आईएएस अधिकारियों के संघ के सचिव जयेश रंजन ने 10 जनवरी को हैदराबाद सेंट्रल क्राइम स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप है कि कुछ चैनलों ने महिला अधिकारी के विरुद्ध मनगढ़ंत और आधारहीन आरोप प्रसारित किए, जिसमें उन्हें राज्य के एक मंत्री के साथ कथित निजी संबंधों से जोड़ा गया। इस शिकायत के आधार पर विशेष जांच दल का गठन किया गया।

दोंथु रमेश को राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पकड़ा गया, जब वह बैंकॉक जाने वाली उड़ान लेने वाले थे, जबकि सुदीर को उनके आवास से हिरासत में लिया गया। एक अन्य पत्रकार परिपूर्णा चारी को पूछताछ के लिए रोका गया और बाद में छोड़ दिया गया।

हैदराबाद पुलिस आयुक्त वी.सी. सज्जनार ने कहा, “बिना किसी आधार के झूठी सूचना फैलाना, विशेषकर महिला अधिकारी के खिलाफ चरित्र हनन करना, बिल्कुल गलत है।” पुलिस ने कई चैनलों और सोशल मीडिया खातों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और महिलाओं के अपमानजनक चित्रण पर रोक अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया।

दोंथु रमेश ने वीडियो बयान में गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए कहा कि वह इसका कानूनी सामना करेंगे। सुदीर ने भी कहा कि उन्हें इस मामले में जिम्मेदार ठहराया गया जबकि उन्होंने प्रसारित सामग्री के लिए कोई उत्तरदायित्व नहीं लिया।

गिरफ्तारी के बाद दोनों पत्रकारों को न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया और उन्हें जमानत मिल गई। न्यायालय ने उन्हें पासपोर्ट जमा करने और शहर से बाहर न जाने की शर्त भी दी।

इस गिरफ्तारी के बाद विपक्षी दलों ने तेलंगाना सरकार और पुलिस पर तीखा निशाना साधा। भारत राष्ट्र समिति ने गिरफ्तारी को अनुचित और कानून के चयनात्मक प्रयोग के रूप में देखा। पूर्व आंध्र प्रदेश मुख्यमंत्री और वाई.एस.आर. कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला करार दिया। वरिष्ठ नेता टी. हरीश राव ने कहा कि देर रात की गिरफ्तारी और छापेमारी लोकतंत्र के खिलाफ है।

कई पत्रकार और मीडिया संगठन इस कदम की निंदा कर रहे हैं। उनका कहना है कि पत्रकारों को आलोचना और जांच करने का कानूनी अधिकार है और राज्य को प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करनी चाहिए। इस तरह की गिरफ्तारी भय का माहौल पैदा कर सकती है।

यह मामला केवल दो पत्रकारों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता, सरकारी दबाव और लोकतांत्रिक मूल्यों पर व्यापक बहस का केंद्र बन गया है। आगे की जांच और विरोध इस मुद्दे को और उभार सकते हैं, जो आने वाले दिनों में राजनीतिक और मीडिया परिदृश्य को प्रभावित करेगा।

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