अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गाज़ा में शांति और पुनर्निर्माण प्रयासों के लिए प्रस्तावित नए अंतरराष्ट्रीय मंच ‘Board of Peace’ में शामिल होने का आमंत्रण भेजा है। इस कदम को मध्य पूर्व में स्थायी शांति स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण वैश्विक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
व्हाइट हाउस द्वारा 16 जनवरी को भेजे गए पत्र में ट्रंप ने कहा है कि यह कदम “इतिहासिक और भव्य प्रयास” का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य गाज़ा संघर्ष को समाप्त कर एक स्थायी और समृद्ध भविष्य सुनिश्चित करना है। उन्होंने इसे “विश्व संघर्षों के समाधान के लिए एक साहसिक नया दृष्टिकोण” बताया।
यह पहल, ट्रंप द्वारा सितंबर 2025 में घोषित 20‑बिंदुओं वाली गाज़ा शांति योजना का दूसरा चरण है, जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने नवंबर में अपने प्रस्ताव रिज़ॉल्यूशन 2803 के माध्यम से स्वीकार किया था। इस योजना का लक्ष्य गाज़ा के लिए स्थायी शांति, सुरक्षा और आर्थिक पुनर्निर्माण को साकार करना है।
‘Board of Peace’ को एक नई अंतरराष्ट्रीय संस्था के रूप में स्थापित किया जाएगा, जो गाज़ा के प्रशासन, स्थिरता और पुनर्निर्माण प्रक्रिया का मार्गदर्शन करेगी। इस बोर्ड में वैश्विक नेताओं और विशेषज्ञों को शामिल कर अनेक देशों के दृष्टिकोण और संसाधन इस शांति प्रयास में एकत्रित करने की योजना है।
अमेरिका के अलावा कनाडा, तुर्की, मिस्र, अर्जेंटीना, साइप्रस, यूनान और पाकिस्तान सहित कई देशों को भी निमंत्रण भेजा गया है। यह उम्मीद की जा रही है कि आगामी वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (DAVOS) में सदस्यों की आधिकारिक सूची घोषित की जाएगी।
भारत को मिले निमंत्रण के बारे में विदेश मंत्रालय की ओर से अभी तक आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत इस बोर्ड में शामिल होता है, तो यह वैश्विक शांति प्रयासों में देश की एक नई भूमिका को रेखांकित करेगा, खासकर मध्य पूर्व के जटिल राजनीतिक परिदृश्य में।
भारत की पारंपरिक विदेश नीति में दो‑राज्य समाधान का समर्थन शामिल रहा है, जिसमें इज़राइल और एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य दोनों की सहअस्तित्व की वकालत की जाती है। ऐसे में ट्रंप की इस पहल में भागीदारी पर नई कूटनीतिक चुनौतियाँ और अवसर दोनों सामने हो सकते हैं।
हालांकि अमेरिका ने बोर्ड को गाज़ा के लिए सकारात्मक कदम बताया है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय सद्भावना और न्यायपूर्ण समाधान की दिशा में इस तरह के मंचों को चलाते समय फिलिस्तीनी प्रतिनिधित्व की कमी और यूएन सहित पारंपरिक संस्थाओं के साथ समन्वय पर गंभीर प्रश्न उठते हैं।
ट्रंप प्रशासन की योजना के तहत यह बोर्ड गाज़ा में दीर्घकालिक शांति की नींव रखने तथा वहां की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे को मजबूती प्रदान करने का काम करेगा। विश्व के अन्य बड़े नेता भी इसमें शामिल हो सकते हैं, जिससे यह पहल नई वैश्विक कूटनीति की दिशा निर्धारित कर सकती है।
