इमारत-ए-शरीया बिहार, ओडिशा और झारखंड की ओर से झारखंड में एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर चलाए गए जागरूकता एवं प्रशिक्षण अभियान का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। एक महीने तक चले इस अभियान के दौरान राज्य के सभी 24 जिलों के 56 से अधिक स्थानों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें आम नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, धार्मिक प्रतिनिधियों, युवाओं और विभिन्न वर्गों के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
इमारत-ए-शरीया के अमीर-ए-शरीयत बिहार, ओडिशा, झारखंड व पश्चिम बंगाल मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी ने अभियान की सफलता पर जारी अपने संदेश में कहा कि एसआईआर से संबंधित सही जानकारी और समय पर जागरूकता बेहद ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि इमारत-ए-शरीया ने अपनी धार्मिक और सामाजिक ज़िम्मेदारी को महसूस करते हुए यह पहल की है, ताकि लोगों में फैली भ्रांतियों को दूर किया जा सके और उन्हें कानूनी व सामाजिक पहलुओं की सही समझ मिल सके।
उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में जागरूकता, विश्वास और आपसी सहयोग को मज़बूत करने की एक गंभीर कोशिश है।
गौरतलब है कि निर्वाचन आयोग देश के विभिन्न राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया चला रहा है, जिसमें झारखंड भी शामिल है। राज्य में एसआईआर से पहले पैरेंटल मैपिंग यानी वर्ष 2003 की मतदाता सूची और वर्तमान मतदाता सूची के मिलान का कार्य किया जा रहा है। इस बार एसआईआर की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक जटिल मानी जा रही है, क्योंकि 2003 की मतदाता सूची में नाम न होने की स्थिति में आधार कार्ड, पैन कार्ड और राशन कार्ड जैसे दस्तावेज़ों को मान्य सूची में शामिल नहीं किया गया है।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए इमारत-ए-शरीया ने बिना किसी धर्म, जाति या समुदाय के भेदभाव के सभी नागरिकों को समय रहते जागरूक करने का निर्णय लिया।
इस उद्देश्य से इमारत-ए-शरीया की रिसर्च टीम और एसआईआर मामलों के विशेषज्ञों पर आधारित एक प्रतिनिधिमंडल झारखंड भेजा गया, जिसमें मुफ्ती क़यामुद्दीन क़ासमी, डॉ. हिफ़्ज़ुर रहमान हफ़ीज़ और मौलाना इकरामुद्दीन क़ासमी शामिल थे। विभिन्न चरणों में इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मुफ्ती मोहम्मद सोहराब नदवी क़ासमी, मौलाना क़मर अनीस क़ासमी, मौलाना अहमद हुसैन क़ासमी और मुफ्ती मोहम्मद अनवर क़ासमी ने किया।
इमारत-ए-शरीया बिहार, ओडिशा और झारखंड के नाज़िम मुफ्ती मोहम्मद सईदुर्रहमान क़ासमी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अभियान के पहले चरण में दर्जनों प्रशिक्षित टीमें तैयार की गई हैं, जो एसआईआर, फॉर्म-6 और फॉर्म-8 से जुड़े मामलों में आम नागरिकों को व्यावहारिक सहयोग और मार्गदर्शन प्रदान करेंगी।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों में प्रोजेक्टर के माध्यम से तैयार सामग्री प्रस्तुत की गई, सवाल-जवाब के सत्र आयोजित किए गए और युवाओं को ज़मीनी स्तर पर प्रभावी भूमिका निभाने के लिए तैयार किया गया। कई स्थानों पर आदिवासी समुदायों के लोगों ने भी सक्रिय भागीदारी की।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह अभियान पूरी तरह सुधारात्मक, रचनात्मक और गैर-राजनीतिक है। इसका उद्देश्य केवल नागरिकों को उनके संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उनके संरक्षण में सहयोग करना है।
इमारत-ए-शरीया ने भरोसा जताया कि एसआईआर की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होने के बाद ये प्रशिक्षित टीमें बिना किसी भेदभाव के जनता और प्रशासन के साथ मिलकर काम करेंगी, ताकि कोई भी नागरिक जानकारी के अभाव या दस्तावेज़ी जटिलताओं के कारण अपने मताधिकार से वंचित न हो।
