पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग ने गंभीर रुख अपनाया है। आयोग ने पटना SSP को नोटिस जारी कर आठ सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। अगली सुनवाई 22 अप्रैल 2026 को होगी।
छात्रा जहानाबाद जिले की निवासी थी और हॉस्टल में रहकर NEET की तैयारी कर रही थी। 6 जनवरी को उसे बेहोशी की हालत में पाया गया और इलाज के दौरान 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई। प्रारंभिक रिपोर्ट में आत्महत्या या ओवरडोज की संभावना बताई गई थी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और FSL जांच में शरीर पर चोटों और संदिग्ध निशानों का उल्लेख किया गया। यह रिपोर्ट इस बात का संकेत देती है कि मामला साधारण मौत नहीं बल्कि गंभीर आपराधिक कृत्य से जुड़ा हो सकता है। परिवार ने निष्पक्ष जांच की मांग की है और POCSO एक्ट के तहत मामले की गंभीरता भी सामने आई है।
बिहार सरकार ने मामले की CBI जांच का आदेश दिया है। जांच में DNA, CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने विशेष जांच टीम (SIT) बनाई है और दो पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया गया है। CBI की जांच के तहत छह संदिग्धों के DNA सैंपल लिए गए हैं।
परिवार और छात्र समुदाय ने शुरू से यौन उत्पीड़न और हत्या का आरोप लगाया है। पटना और अन्य शहरों में प्रदर्शन हुए और निष्पक्ष जांच और कड़ी सजा की मांग की गई। भारतीय मेडिकल एसोसिएशन ने डॉक्टरों की सुरक्षा की भी मांग की है।
आयोग ने SSP को नोटिस जारी कर कहा कि सभी पहलुओं की गहन और निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। आयोग ने संकेत दिया कि यदि जांच में लापरवाही पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होगी। CBI जांच से आरोपी की पहचान और आगे की कार्रवाई तय होगी। यह मामला निष्पक्षता, छात्र सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही के सवालों पर राष्ट्रीय बहस का केंद्र बना हुआ है।