पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव के बीच कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। फ्रांस ने ईरान के खिलाफ किसी व्यापक सैन्य कार्रवाई का समर्थन करने से इनकार कर दिया है। वहीं, फ्रांसीसी राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने इज़राइल को लेबनान में जमीनी घुसपैठ के संभावित परिणामों को लेकर आगाह किया है। इसी बीच United Nations के महासचिव ने गाज़ा में “मानव-निर्मित मानवीय संकट” की चेतावनी दी है।
फ्रांस का स्पष्ट संदेश: युद्ध नहीं, संवाद
राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि क्षेत्र में तनाव को और भड़काने वाली किसी भी सैन्य कार्रवाई से बचना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसकी क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर चिंताएं गंभीर हैं, लेकिन समाधान कूटनीतिक प्रयासों और अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में ही तलाशा जाना चाहिए।
फ्रांस, जो ईरान परमाणु समझौते का प्रमुख पक्षकार रहा है, मानता है कि सैन्य विकल्प से हालात नियंत्रण से बाहर जा सकते हैं और इसका असर खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता, वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है।
लेबनान सीमा पर बढ़ती हलचल
इस बीच Israel Defense Forces ने पुष्टि की है कि उसके सैनिक दक्षिणी लेबनान में सीमित अभियानों में शामिल हैं। इज़राइल का कहना है कि यह कार्रवाई लेबनान स्थित संगठन हीजबूल्लाह द्वारा किए गए हमलों के जवाब में की जा रही है।
राष्ट्रपति मैक्रों ने लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करने पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी व्यापक जमीनी अभियान से पूरा क्षेत्र युद्ध की चपेट में आ सकता है। फ्रांस पारंपरिक रूप से लेबनान की राजनीतिक स्थिरता का समर्थक रहा है और वहां शांति बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभाता रहा है।
गाज़ा में बिगड़ती मानवीय स्थिति
गाज़ा में जारी हमलों और आपूर्ति संकट के बीच António Guterres ने चेतावनी दी है कि स्थिति “मानव-निर्मित मानवीय संकट” का रूप ले चुकी है।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, बुनियादी ढांचे के नुकसान, खाद्य और दवाइयों की कमी तथा बड़े पैमाने पर विस्थापन ने लाखों लोगों को संकट में डाल दिया है। अस्पतालों पर भारी दबाव है और राहत एजेंसियां तत्काल युद्धविराम तथा मानवीय सहायता की निर्बाध आपूर्ति की मांग कर रही हैं।
व्यापक संघर्ष की आशंका
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान-इज़राइल तनाव, लेबनान सीमा पर सैन्य गतिविधियां और गाज़ा का संकट—तीनों घटनाक्रम एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। यदि हालात पर शीघ्र नियंत्रण नहीं पाया गया, तो यह टकराव व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है।
फ्रांस की संयमित नीति और संयुक्त राष्ट्र की सख्त टिप्पणी यह संकेत देती है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब संघर्ष के विस्तार को रोकने के लिए सक्रिय कूटनीति पर जोर दे रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयास क्षेत्र में स्थिरता ला पाएंगे या तनाव और गहराएगा।