खाड़ी युद्ध: भारत से लौट रहे ईरानी युद्धपोत ‘आईआरआईएस डेना’ पर हिंद महासागर में अमेरिकी हमला, 87 नाविकों की मौत; श्रीलंका के पास डूबे जहाज से बचाव अभियान, क्षेत्रीय तनाव गहराया

हिंद महासागर में एक गंभीर सैन्य घटना ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और समुद्री सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। अमेरिकी नौसेना की एक पनडुब्बी के हमले में ईरान का युद्धपोत ‘आईआरआईएस डेना’ डूब गया, जिसमें कम से कम 87 ईरानी नाविकों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार यह घटना श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई। हमले के बाद जहाज से संकट संदेश भेजा गया, जिसके बाद श्रीलंका की नौसेना ने तत्काल बचाव अभियान शुरू किया। अधिकारियों का कहना है कि कई नाविकों को समुद्र से जीवित निकाला गया है और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है।

भारत में नौसैनिक कार्यक्रम से लौट रहा था जहाज

बताया जा रहा है कि ईरान का यह युद्धपोत हाल ही में भारत के विशाखापत्तनम में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास मिलन-2026 में भाग लेने के बाद अपने देश लौट रहा था। इन कार्यक्रमों में दुनिया के कई देशों की नौसेनाओं ने हिस्सा लिया था।

युद्धपोत के भारत से लौटने के तुरंत बाद हुए इस हमले ने क्षेत्रीय रणनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।

ईरान का कड़ा विरोध

ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे “अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन और समुद्र में किया गया जघन्य अपराध” बताया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि जहाज किसी सैन्य अभियान में शामिल नहीं था और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में नियमित यात्रा कर रहा था।

ईरान के अनुसार जहाज पर करीब 130 नाविक सवार थे, जिनमें से बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए हैं।

श्रीलंका के पास दूसरा ईरानी जहाज

इस घटना के बाद एक दूसरा ईरानी जहाज भी श्रीलंका के समुद्री क्षेत्र के पास पहुंच गया है। श्रीलंका सरकार ने कहा है कि वह जहाज पर मौजूद लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थिति पर नजर रखे हुए है और आवश्यक मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है।

क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना केवल एक नौसैनिक हमला नहीं, बल्कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के हिंद महासागर तक फैलने का संकेत हो सकती है। यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल इस घटना को लेकर अमेरिका, ईरान और क्षेत्र के अन्य देशों की प्रतिक्रियाओं पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

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