वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व बिहार विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव को नागालैंड का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी से यह नियुक्ति 5 मार्च 2026 को औपचारिक रूप से घोषित की गई। यह नामांकन देश के नौ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में किए गए व्यापक प्रशासनिक फेरबदल का हिस्सा है।
राष्ट्रपति सचिवालय की अधिसूचना के अनुसार, नंद किशोर यादव जल्द ही नागालैंड के राज्यपाल के रूप में शपथ लेंगे। इसके साथ ही लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन को बिहार का राज्यपाल बनाया गया है। पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, महाराष्ट्र, दिल्ली और लद्दाख में भी उच्च पदाधिकारियों और राजनेताओं के फेरबदल किए गए हैं।
लंबा राजनीतिक अनुभव और संवैधानिक जिम्मेदारी
नंद किशोर यादव बिहार की राजनीति के सबसे अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। उनका राजनीतिक सफर 1969 में जनसंघ से शुरू हुआ। वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सक्रिय सदस्य रहे और 1974-76 के जेपी आंदोलन में भाग लेकर 15 महीने जेल भी काटी।
1978 में पटना निगम पार्षद बने, 1982 में डिप्टी मेयर और 1983 में पटना के मेयर रहे। 1995 में पहली बार विधायक चुने गए और लगातार सात बार जीत दर्ज की। उन्होंने भवन निर्माण, पर्यटन मंत्री, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और बिहार विधानसभा अध्यक्ष जैसे पदों पर कार्य किया।
2025 में विधानसभा चुनावों में उनका नाम भाजपा की प्रत्याशी सूची में नहीं था। लेकिन अब उन्हें संवैधानिक पद देकर पार्टी ने सम्मान और जिम्मेदारी दोनों प्रदान किए हैं।
बिहार में राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
बिहार के राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह नियुक्ति केवल सम्मान नहीं बल्कि भाजपा द्वारा वरिष्ठ नेताओं को संवैधानिक भूमिका देने की रणनीति भी है।
भाजपा के कई नेताओं ने नंद किशोर यादव को बधाई दी है। उनका कहना है कि यादव के अनुभव और नेतृत्व क्षमता से नागालैंड में प्रशासनिक और सामाजिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
देशव्यापी प्रशासनिक बदलाव
राष्ट्रपति के आदेश के तहत देशभर में राजभवनों और उपराजभवनों में बड़े स्तर पर फेरबदल किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे कदम केंद्र सरकार द्वारा राजनीतिक संतुलन, राज्य और संघीय शासन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उठाए जाते हैं।