इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच बढ़ते संघर्ष ने लेबनान में तबाही मचा दी है। इस हफ्ते इज़राइली हवाई हमलों और मिसाइल बमबारी में कम से कम 123 लोग मारे गए और 683 घायल हुए हैं।
दक्षिणी बेरूत के दाहियेह इलाक़े और लेबनान के अन्य हिस्से हवाई हमलों की चपेट में आए। इलाके में भारी धुआँ और तबाही देखी गई। इज़राइल ने दक्षिणी लेबनान और बीक़ा वैली के निवासियों को तुरंत घर छोड़ने और उत्तर की ओर जाने की चेतावनी दी।
लेबनान की सरकार के अनुसार अब तक लगभग 83,000 लोग शरणार्थी केंद्रों में पहुँचे हैं, जबकि 38,000 से अधिक लोग, मुख्यतः सीरियाई शरणार्थी, सीरिया चले गए।
हिज़्बुल्लाह ने भी जवाबी कार्रवाई की। संगठन ने लेबनान में इज़राइली सैनिक ठिकानों और वाहनों पर हमले का दावा किया। गोलान हाइट्स में भी हिज़्बुल्लाह ने हमला किया।
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने इस बड़ी निकासी को अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि जबरन विस्थापन “अन्यायपूर्ण और अवैध” है।
मानवीय संकट बढ़ता जा रहा है। UNHCR ने इसे “मध्यम-पूर्व का सबसे बड़ा मानवीय आपातकाल” बताया। स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी ढांचे पर बोझ बढ़ा है, और रोग और सफाई से जुड़ी समस्याएँ फैल रही हैं।
राजनीतिक रूप से यह संघर्ष केवल लेबनान तक सीमित नहीं। इज़राइल‑ईरान टकराव के बीच यह युद्ध क्षेत्रीय टकराव का हिस्सा बन गया है। इतिहास में भी 2006 के लेबनान युद्ध के दौरान इसी तरह के विस्थापन और तबाही देखी गई थी।