खाड़ी युद्ध:ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने पड़ोसी देशों पर हमलों के लिए मांगी माफी, दोहा में धमाका; ट्रम्प के ‘ईरान के नए नेता’ में दखल पर तेहरान का कड़ा जवाब

खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ता जा रहा है। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने पड़ोसी देशों पर हमलों के लिए माफी मांगी, लेकिन उनका बयान प्रसारित होते ही Doha में विस्फोट की आवाज़ सुनाई दी। क्षेत्र में अमेरिकी और इज़राइली हमलों का सिलसिला जारी है।

ट्रम्प का दावा और ईरानी प्रतिक्रिया

अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि उन्हें ईरान के अगले सर्वोच्च नेता के चयन में दखल देना चाहिए। ईरान की संसद के अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने इसे सख्ती से खारिज किया और कहा, “ईरान का भविष्य केवल ईरानी जनता तय करेगी, किसी विदेशी की नहीं।”

ग़ालिबाफ ने सोशल मीडिया पर लिखा कि “हमारे देश का भाग्य किसी बाहरी शक्ति या ‘एपस्टीन गिरोह’ द्वारा तय नहीं किया जाएगा।”

नई दिल्ली में ईरानी उप विदेश मंत्री का बयान

ईरान के उप विदेश मंत्री Saeed Khatibzadeh ने Raisina Dialogue में कहा कि ट्रम्प अपने ही देश में न्यूयॉर्क के मेयर को नहीं चुन सकते, फिर ईरान के नेता को बदलने की कोशिश क्यों करें। उन्होंने इसे “उपनिवेशवादी रवैया” करार दिया।

वेनेज़ुएला मॉडल’ लागू करने की कोशिश

ट्रम्प ने कहा कि ईरान में Venezuela जैसी स्थिति चाहिए—जहाँ सत्ता का ढांचा बरकरार रहे लेकिन नेतृत्व बदल जाए। उन्होंने नया ईरानी नेता ऐसा होने की शर्त रखी कि वह अमेरिका और इज़राइल के हितों के अनुरूप काम करे।

विशेषज्ञ Sina Azodi ने कहा कि ईरान में ऐसा कोई नेता नहीं है जो विदेशी दबाव में सत्ता संभाले। ईरान की अगली पीढ़ी के नेताओं के भीतर सभी उम्मीदवार इस्लामिक रिपब्लिक सिस्टम के प्रति वफादार रहेंगे।

सुप्रीम लीडर का चुनाव

ईरान का सर्वोच्च नेता 88 सदस्यों की Assembly of Experts द्वारा चुना जाएगा। ट्रम्प ने संभावित उम्मीदवार Mojtaba Khamenei का विरोध करते हुए उन्हें “कमज़ोर” बताया।

युद्धविराम या वार्ता नहीं

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि न तो किसी युद्धविराम की योजना है और न ही अमेरिका से बातचीत की कोई पहल हुई है। उन्होंने साफ कहा, “न सीज़फ़ायर, न कोई बातचीत—और अमेरिका को कोई कॉल नहीं की गई।”

युद्ध प्रचार और राष्ट्रीय भावना

अमेरिकी और इज़राइली अधिकारियों का दावा है कि ईरान भारी नुकसान झेल रहा है। लेकिन तेहरान का कहना है कि उनके हमले अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए भारी कीमत चुकाने पर मजबूर करेंगे।

विशेषज्ञों के अनुसार, भले ही अमेरिका और इज़राइल की सैन्य ताकत अधिक हो, लेकिन ईरान की विशाल भौगोलिक स्थिति, राष्ट्रीय पहचान और सांस्कृतिक एकजुटता उसे लंबे संघर्ष में टिके रहने की क्षमता देती है।

Sina Azodi का कहना है कि “कोई भी देश नहीं चाहता कि कोई बाहरी ताकत उसके भविष्य का फैसला करे। राष्ट्रवाद की यही ताकत ईरान में दिखाई दे रही है।”

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