शिक्षा, स्वास्थ्य और कानूनी सहायता के क्षेत्र में कार्यरत गैर-लाभकारी संस्था ग्रिनस्पायर वेलफेयर फाउंडेशन ने 6 मार्च 2026 को राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग द्वारा जारी एक हालिया नोटिस को भारत के सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने की घोषणा की है। संस्था का कहना है कि इस नोटिस के कारण देशभर के कई छात्रों के सामने गंभीर कठिनाइयाँ और अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई है।
फाउंडेशन के अनुसार, आयोग द्वारा जारी इस नोटिस का प्रभाव अनेक विद्यार्थियों पर प्रतिकूल रूप से पड़ा है, जिसके चलते संगठन ने इसके विरुद्ध न्यायिक समीक्षा की मांग करते हुए अदालत का दरवाज़ा खटखटाने का निर्णय लिया है।
मामले में फाउंडेशन की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता एम. आदिल ज़फर ने कहा कि यह मुद्दा संवैधानिक और प्रशासनिक क़ानून से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को उठाता है, जिन पर सर्वोच्च न्यायालय का तत्काल ध्यान आवश्यक है।
उन्होंने कहा, “6 मार्च 2026 को जारी नोटिस ने निष्पक्षता, पारदर्शिता और छात्रों के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा कर दी हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप आवश्यक है कि नियामक कार्रवाइयों के कारण छात्रों को किसी प्रकार की अनुचित हानि न उठानी पड़े।”
ग्रिनस्पायर वेलफेयर फाउंडेशन ने उन छात्रों और अन्य व्यक्तियों से भी आगे आने की अपील की है, जो इस नोटिस से प्रभावित हुए हैं। संगठन का कहना है कि प्रभावित छात्रों की जानकारी और अनुभव इस कानूनी चुनौती को मज़बूत बनाने में सहायक होंगे।
संस्था के अनुसार, प्रस्तावित याचिका के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय से ऐसे उपयुक्त निर्देश जारी करने की मांग की जाएगी, जिससे छात्रों के हितों और अधिकारों की समुचित रक्षा सुनिश्चित हो सके।
फाउंडेशन ने यह भी बताया कि जो छात्र या अन्य व्यक्ति इस नोटिस से प्रभावित हैं, वे 9718247570 पर संपर्क कर अपनी जानकारी साझा कर सकते हैं या इस पहल का समर्थन कर सकते हैं।