नेपाल की राजनीति में नाटकीय घटनाक्रम के बीच सत्ता परिवर्तन के तुरंत बाद नई सरकार ने कड़ा संदेश देते हुए पूर्व प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई वर्ष 2025 में हुए ‘जेन ज़ेड आंदोलन’ के दौरान भड़की हिंसा और हुई मौतों के मामलों से जुड़ी बताई जा रही है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, दोनों वरिष्ठ नेताओं को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है और मामले की गहन जांच जारी है। इस घटनाक्रम ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है और इसे जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।
नई सरकार का नेतृत्व कर रहे बालेन शाह ने हाल ही में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली है। शपथ ग्रहण के मात्र एक दिन बाद ही हुई यह कार्रवाई सरकार के सख्त और सक्रिय रुख को दर्शाती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम नई सत्ता की प्राथमिकताओं और संदेश दोनों को स्पष्ट करता है।
वर्ष 2025 में नेपाल में शुरू हुआ ‘जेन ज़ेड आंदोलन’ भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी और सरकारी नीतियों के विरोध में तेजी से फैल गया था। प्रारंभ में शांतिपूर्ण रहे इस आंदोलन ने बाद में कई स्थानों पर हिंसक रूप ले लिया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इन घटनाओं में लगभग 76 लोगों की जान गई, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए। उस समय सुरक्षा बलों की कार्रवाई, विशेषकर गोलीबारी, को लेकर व्यापक विवाद और आलोचना सामने आई थी।
सरकारी जांच आयोग की रिपोर्ट में तत्कालीन सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। रिपोर्ट में कहा गया कि हालात को संभालने में गंभीर चूक हुई और समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। विशेष रूप से पूर्व गृह मंत्री की भूमिका को लेकर भी जांच के दायरे में कई अहम बिंदु सामने आए हैं। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।
गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। पूर्व प्रधानमंत्री ओली के समर्थकों ने इस कदम को राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया है, जबकि सरकार का कहना है कि यह कदम पूरी तरह कानून और जांच रिपोर्ट के आधार पर उठाया गया है। सरकार की ओर से स्पष्ट संकेत दिए गए हैं कि दोषी पाए जाने पर किसी भी पद या प्रभाव को देखते हुए किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
इस बीच, गिरफ्तारी के बाद पूर्व प्रधानमंत्री ओली की तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आई है, जिसके चलते उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।
आने वाले दिनों में इस मामले में अदालत में पेशी और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई नेपाल की राजनीति में जवाबदेही और पारदर्शिता के नए अध्याय की शुरुआत का संकेत हो सकती है, जिसका प्रभाव लंबे समय तक देखने को मिल सकता है।
