क्या दलित और आदिवासी नहीं रहेंगे एससी/एसटी में?भाजपा के पोस्टर से उठने लगे सवाल

दिल्ली (इंसाफ़ टाइम्स डेस्क) क्या भारतीय जनता पार्टी दलितों और आदिवासियों को एससी/एस/टी कैटेगरी से अलग करने की कोई मंशा रखती है? ये सवाल सोशल मीडिया पर किया जा रहा है, लोगों के इस सवाल का कारण बीजेपी की तरफ़ से जारी “बंटेंगे तो कटेंगे” पोस्टर है

भारतीय जनता पार्टी ने एक पोस्टर जारी किया है जिसमें हाथ की पांच उंगलियों पर अलग अलग दलित,ब्राह्मण,एस.सी/एस.टी,आदिवासी और ओबीसी जबकि हाथ के बाकी जगहों पर राजपूत,जाट,गुजर,वैश्य,जैन,लिंगायत,क्षेत्रीय और मीणा लिखा गया है,और उस पोस्टर में “बंटेंगे तो कटेंगे” का नारा भी लिखा गया है

इस पोस्टर से भाजपा इन सब समाज के हिन्दू होने और हिंदू समाज को एक रहने का इशारा करती नज़र आ रही है,लेकिन बहस ये छिड़ गई है कि दलित और आदिवासी का नाम अलग और एस/सी व एस/टी का नाम अलग क्यूं लिखा गया है?लोग सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं कि कहीं दलितों और आदिवासियों के खिलाफ़ किसी बड़ी साज़िश की तैयारी तो नहीं है?

कांग्रेस युवा विंग के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास.बी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है कि “BJP का ये पोस्टर बेहद खतरनाक है, क्या आदिवासी वर्ग अब ST में नही रहेगा? क्या दलित समाज अब SC में नही रहेगा? BJP के भारत में Minority की कोई जगह नही? क्या भाजपा कोई बडी साजिश रचने जा रही है?”

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