सुप्रीम कोर्ट ने SDPI के सदस्य शब्बर खान के मामले में NIA से पूछा – 2020 बेंगलुरु दंगों के मामले में आरोप तय करने और ट्रायल शुरू करने में कितना समय लगेगा?

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

सुप्रीम कोर्ट ने आज (31 जनवरी) को राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) से पूछा कि 2020 बेंगलुरु दंगों के मामले में आरोप तय करने और ट्रायल शुरू करने में उन्हें कितना समय लगेगा?। यह मामला शब्बर खान द्वारा दायर की गई जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया, जो कि SDPI (सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया) के सदस्य हैं और UAPA (गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम) के तहत दंगे से संबंधित आरोपों में चार्जशीटेड हैं।

सुप्रीम कोर्ट का यह सवाल इस संदर्भ में था कि बेंगलुरु में 11 अगस्त 2020 को हुए दंगों के बाद शब्बर खान समेत 198 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इनमें से 138 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया है, और इनमें से 25 व्यक्तियों पर UAPA की धाराएं लगाई गई हैं। यह दंगे एक फेसबुक पोस्ट को लेकर भड़के थे, जिसमें कथित तौर पर पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की गई थी।

NIA ने अदालत को बताया कि इस मामले में SDPI, जो कि प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का राजनीतिक अंग है, के सदस्य शामिल थे। आरोप है कि इन लोगों ने एक बड़े जनसमूह को इकट्ठा कर डी.जे. हल्ली और के.जी. हल्ली पुलिस थानों पर हमले और सार्वजनिक संपत्ति की तोड़फोड़ की योजना बनाई थी।

सुप्रीम कोर्ट में शब्बर खान के वकील ने लंबी हिरासत को लेकर सवाल उठाए और कहा कि उनका मुवक्किल एफआईआर में नामजद नहीं है, और आरोप केवल इस पर हैं कि वह एक भीड़ के साथ मिलकर मोटरसाइकिल जलाने में शामिल था। वकील ने यह भी बताया कि पूरे राज्य में सिर्फ एक ही NIA कोर्ट है, जहां 254 गवाहों की गवाही होनी है, और यह कोर्ट पहले से ही ओवरबर्डन है।

इस पर न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति सत्यश चंद्र शर्मा की बेंच ने ASG (एडिशनल सॉलिसिटर जनरल) से पूछा कि इस मामले में आरोप तय करने और ट्रायल शुरू करने में कितना समय लगेगा?, क्योंकि यह मामला बहुत लंबा खींच सकता है। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने यह भी कहा, “यदि बहुत सारे आरोपी हैं, तो यह एक लंबी प्रक्रिया बन सकती।”

इस मामले की अगली सुनवाई 13 फरवरी 2025 को होगी, जब ASG से ट्रायल की वास्तविक स्थिति और समय सीमा के बारे में जानकारी मांगी जाएगी।

स्रोत: लाइवलॉ

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