दिल्ली चुनाव:कांग्रेस-आप के अलगाव से बीजेपी की जीत, बिहार में महागठबंधन के लिए सबक

इंसाफ़ टाइम्स डेस्क

हाल ही में संपन्न हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने 27 वर्षों बाद सत्ता में वापसी की है। बीजेपी ने 70 में से 48 सीटें जीतीं, जबकि आम आदमी पार्टी (आप) 22 सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस एक बार फिर खाता खोलने में नाकाम रही, लेकिन उसने 14 सीटों पर आप के वोट काटकर अप्रत्यक्ष रूप से बीजेपी की मदद की।

*दिल्ली चुनाव के नतीजों का बिहार पर प्रभाव
दिल्ली में कांग्रेस और आप के अलग-अलग चुनाव लड़ने से बीजेपी को स्पष्ट बहुमत मिला। इस नतीजे का असर बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है। कांग्रेस ने 2020 के फॉर्मूले के तहत 70 सीटों पर दावेदारी जताई है। कटिहार के कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने कहा, “पार्टी को यह तय करना होगा कि वह गठबंधन की राजनीति करेगी या अकेले चुनाव लड़ेगी।”

*महागठबंधन में सीट बंटवारे पर रस्साकशी
2020 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के तहत कांग्रेस ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन वह केवल 19 सीटें जीत पाई थी। इस बार राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) 150 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही है। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह 2020 के फॉर्मूले से कम पर समझौता नहीं करेगी।

कांग्रेस नेता प्रेमचंद मिश्रा ने कहा, “जो लोग कांग्रेस को कमजोर समझ रहे हैं, वे राजनीतिक रूप से अपरिपक्व हैं। बिना कांग्रेस के सहयोग के कोई भी सेकुलर गठबंधन सफल नहीं हो सकता।”

*महागठबंधन के लिए चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महागठबंधन के दल आपसी मतभेद नहीं सुलझाते हैं, तो इसका सीधा लाभ बीजेपी और एनडीए को मिलेगा। वरिष्ठ पत्रकार सुनील पांडेय के अनुसार, “महागठबंधन को मजबूती से लड़ने के लिए कांग्रेस और आरजेडी को मिल बैठकर सीटों का तालमेल करना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो इसका नुकसान पूरे गठबंधन को होगा।”

दिल्ली चुनाव के नतीजे महागठबंधन के लिए एक चेतावनी हैं। यदि बिहार में कांग्रेस और आरजेडी आपसी मतभेदों को समय रहते नहीं सुलझाते हैं, तो इसका फायदा बीजेपी को मिल सकता है। महागठबंधन के दलों को एकजुट होकर रणनीति बनानी होगी, ताकि आगामी चुनाव में सफलता हासिल की जा सके।

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