इंसाफ़ टाइम्स डेस्क
केंद्रीय दारुल क़ज़ा, इमारत-ए-शरीया बिहार, ओडिशा और झारखंड ने घोषणा की है कि रमज़ान 1446 हिजरी का चांद नजर नहीं आया है। इस कारण, शाबान का महीना 30 दिनों का पूरा किया जाएगा और पहला रोज़ा 2 मार्च 2025, रविवार को रखा जाएगा।
केंद्रीय दारुल क़ज़ा के क़ाज़ी-ए-शरीयत, हज़रत मौलाना मोहम्मद अनज़ार आलम क़ासमी ने अपने ऐलान में बताया कि आज, शुक्रवार 29 शाबान 1446 हिजरी, यानी 28 फरवरी 2025 को फुलवारी शरीफ और उसके आसपास के क्षेत्रों में चांद नजर नहीं आया। इसके अलावा, देश के किसी भी हिस्से से चांद देखे जाने की कोई पुष्ट सूचना नहीं मिली।
चूंकि चांद नहीं दिखा, इसलिए शरई नियमों के अनुसार शाबान के 30 दिन पूरे किए जाएंगे और रमज़ान की शुरुआत 2 मार्च 2025, रविवार से होगी। हज़रत मौलाना ने सभी मुस्लिम भाइयों से अपील की कि वे रमज़ान की तैयारी करें और 2 मार्च से रोज़ा रखने का एहतमाम करें।
इस मौके पर, नायब क़ाज़ी-ए-शरीयत और रूयत-ए-हिलाल कमेटी के कन्वीनर, हज़रत मौलाना मोहम्मद मुजीबुर्रहमान क़ासमी ने भी इस घोषणा की पुष्टि की और बताया कि इमारत-ए-शरीया की रूयत-ए-हिलाल कमेटी ने तमाम शरई प्रक्रिया को पूरा करने के बाद यह फैसला लिया है।
गौरतलब है कि इमारत-ए-शरीया बिहार, ओडिशा और झारखंड के मुसलमानों का धार्मिक और शरई मार्गदर्शन करने में अहम भूमिका निभाता है और हर साल चांद के ऐलान में इस्लामी नियमों का पालन करता है।
अल्लाह तआला तमाम मुसलमानों को रमज़ान की बरकतों से नवाजे। आमीन।