इंसाफ़ टाइम्स डेस्क
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को दिल्ली के सुंदर नर्सरी में आयोजित सूफी संगीत समारोह ‘जहान-ए-खुसरो’ के 25वें संस्करण में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने आगामी रमज़ान महीने की मुबारकबाद देते हुए कहा, “रमज़ान का मुबारक महीना भी शुरू होने वाला है, मैं आप सभी को और सभी देशवासियों को रमज़ान की भी मुबारकबाद देता हूं।”
संस्कृत भाषा की प्रशंसा
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने सूफी संत अमीर खुसरो का उल्लेख करते हुए संस्कृत भाषा की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि खुसरो ने संस्कृत को दुनिया की सबसे बेहतरीन भाषा बताया था!
सूफी परंपरा और भारतीय संस्कृति
प्रधानमंत्री मोदी ने सूफी परंपरा की भारतीय संस्कृति में गहरी जड़ों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सूफी संतों ने खुद को मस्जिदों और खानकाहों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि वेदों और पवित्र कुरान दोनों का अध्ययन किया। उन्होंने रसखान का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे एक मुस्लिम कवि ने भगवान कृष्ण के प्रति भक्ति कविताएं लिखीं, जो हमारी साझा विरासत का प्रतीक है।
‘जहान-ए-खुसरो’ के
इस आयोजन में सूफी संगीत की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। प्रधानमंत्री ने कलाकारों के साथ समय बिताया और उनकी प्रस्तुतियों की सराहना की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस कार्यक्रम में उपस्थिति ने सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया। रमज़ान की शुभकामनाएं और संस्कृत भाषा की प्रशंसा के माध्यम से उन्होंने भारतीय संस्कृति की समृद्धि और विविधता को रेखांकित किया।