इंसाफ़ टाइम्स डेस्क
भारत में मुस्लिम समुदाय की साक्षरता दर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने हाल ही में बताया कि 2001 की जनगणना के अनुसार, 7 वर्ष और उससे अधिक आयु के मुसलमानों की साक्षरता दर 59.1% थी, जो 2011 में बढ़कर 68.5% हो गई। यह 9.4% की वृद्धि को दर्शाता है।
आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) 2023-24 के अनुसार, इस आयु वर्ग में मुसलमानों की साक्षरता दर बढ़कर 79.5% हो गई है, जबकि सभी धर्मों के लिए यह दर 80.9% है। ये आंकड़े मुस्लिम समुदाय में शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता और सरकारी नीतियों के प्रभाव को दर्शाते हैं।
मंत्री रिजिजू ने कहा कि अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय छह अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों—बौद्ध, ईसाई, जैन, मुस्लिम, पारसी और सिख—के कल्याण और सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए विभिन्न नीतियों, योजनाओं और कार्यक्रमों को लागू कर रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों को सशक्त बनाना, बुनियादी ढांचे का विकास करना और आर्थिक उन्नति को सुनिश्चित करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा की इस बढ़ती प्रवृत्ति से मुस्लिम समुदाय के सामाजिक और आर्थिक विकास को गति मिलेगी। हालांकि, कुछ शिक्षाविदों का कहना है कि सरकार को उच्च शिक्षा और रोजगारोन्मुखी कार्यक्रमों पर अधिक ध्यान देना चाहिए, ताकि इस साक्षरता दर का लाभ युवाओं के करियर और समग्र उन्नति में भी दिखाई दे।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि मुस्लिम समुदाय में साक्षरता दर में लगातार सुधार हो रहा है, जो देश के समग्र विकास और सामाजिक समरसता के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
