इंसाफ़ टाइम्स डेस्क
बिहार के दरभंगा जिले के कमतौल प्रखंड के रमौल गांव में होली के दौरान जुलूस को लेकर हुए विवाद ने तूल पकड़ लिया है। इस घटना में पुलिस पर गंभीर आरोप लगे हैं, जिसमें मुस्लिम पक्ष ने दावा किया है कि पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए उनकी महिलाओं के साथ मारपीट की और अभद्र व्यवहार किया। पुलिस ने इस मामले में कुल 129 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है, जिसमें से दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है!
विवाद की शुरुआत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, होली के दिन रमौल गांव में एक जुलूस निकाला जा रहा था, जो मुस्लिम बहुल इलाके से गुजर रहा था। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह जुलूस उस रास्ते से निकाला गया, जहां पहले कभी ऐसा कोई आयोजन नहीं हुआ था। खास तौर पर, यह घटना इफ्तार के समय हुई, जिसे लेकर मुस्लिम समुदाय ने विरोध जताया। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक और फिर झड़प हो गई।
मुस्लिम पक्ष के आरोप
मुस्लिम समुदाय ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस ने मामले को शांत करने के बजाय एकतरफा कार्रवाई की। गांव की महिलाओं ने दावा किया कि महिला एसडीपीओ (सब डिविजनल पुलिस ऑफिसर) ने न सिर्फ उनके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, बल्कि उन्हें बुरी तरह पीटा भी। एक महिला ने बताया, “हम अपने घरों में इफ्तार की तैयारी कर रहे थे, तभी जुलूस की भीड़ आई और हंगामा शुरू हो गया। जब हमने इसका विरोध किया, तो पुलिस ने हमें ही निशाना बनाया।”
मुस्लिम पक्ष का यह भी आरोप है कि पुलिस ने बिना जांच-पड़ताल के 129 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की, जिसमें ज्यादातर मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल हैं। उनका कहना है कि यह कार्रवाई उन्हें डर के साए में जीने के लिए मजबूर कर रही है।
पुलिस की कार्रवाई
कमतौल पुलिस ने इस मामले में अब तक दो लोगों, मोहम्मद मोती और मोहम्मद मुख्तार, को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा, 100 अज्ञात और 29 नामजद लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। हालांकि, पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जिससे इस मामले की सच्चाई और गंभीरता पर सवाल उठ रहे हैं।
गांव में तनाव का माहौल
विवाद और पुलिस कार्रवाई के बाद रमौल गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है। मुस्लिम समुदाय का कहना है कि वे इस घटना से आहत हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं। वहीं, प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है।
सवालों के घेरे में पुलिस की भूमिका
इस घटना ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुस्लिम पक्ष का आरोप है कि पुलिस ने निष्पक्षता नहीं दिखाई और एक समुदाय विशेष को निशाना बनाया। दूसरी ओर, इस मामले में पुलिस के मौन ने संदेह को और गहरा कर दिया है।
