गरीबों, दलितों और अल्पसंख्यकों पर बढ़ते दमन और बुलडोजर राज के खिलाफ मुजफ्फरपुर के मुशहरी में आंबेडकर भवन के बाहर दमन विरोधी संघर्ष मोर्चा के बैनर तले जन कन्वेंशन और प्रतिवाद मार्च आयोजित किया गया। इसमें सैकड़ों रसोइया, दलित, पिछड़ा, गरीब और अल्पसंख्यक युवा शामिल हुए, वहीं वामपंथी, समाजवादी और भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने भी भाग लिया।
जन कन्वेंशन की अध्यक्षता कम्युनिस्ट नेता परशुराम पाठक ने की, जबकि संचालन भीम आर्मी नेता अवधेश रजक ने संभाला। सभा को संबोधित करते हुए आजाद समाज पार्टी के औराई विधानसभा क्षेत्र के पूर्व उम्मीदवार आफताब आलम ने कहा कि नीतीश सरकार गरीबों, दलितों और अल्पसंख्यकों पर बुलडोजर चलाकर अन्याय कर रही है। उन्होंने नवादा में मोहम्मद अतहर हुसैन की मॉब लिंचिंग और मुशहरी थाना क्षेत्र में शिक्षिका कोमल कुमारी की निर्मम हत्या के लिए सीधे तौर पर सरकार को जिम्मेदार ठहराया और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की।
कम्युनिस्ट नेता परशुराम पाठक ने कहा कि बिहार में अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं। अतिक्रमण हटाने के बहाने गरीब, दलित और फुटपाथी दुकानदारों को उजाड़ा जा रहा है। उन्होंने माइक्रो फाइनेंस कंपनियों द्वारा महिलाओं को कर्ज में फंसा कर मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान करने की भी निंदा की। उन्होंने सरकार से बुलडोजर चलाने पर तत्काल रोक लगाने, गरीबों के बसने की व्यवस्था करने और महिलाओं के सभी कर्ज माफ करने की मांग की।
सभा को औराई विधानसभा से आज़ाद समाज पार्टी के प्रत्याशी रहे आफ़ताब आलम,भीम आर्मी जिला अध्यक्ष राम नरेश राम, SUCI कम्युनिस्ट नेता लालाबाबू महतो, CPI-ML नेता परमानंद पाठक, ओमप्रकाश सिंह, कृष्णनंदन झा, जगत नारायण राय, तैयब अंसारी, राजेश राम, विमला देवी, सुनीता देवी, गंगा राम, चंचला देवी, आनंदी पासवान, अच्छेलाल पासवान ने भी संबोधित किया।
इसी बीच, औराई विधानसभा क्षेत्र के उफरौली गांव में भी बुलडोजर कार्रवाई का मामला सामने आया। कटाई पंचायत के उपरौली गांव में एक घर पर प्रशासन ने बुलडोजर चलाया। पीड़ित गृहणी का कहना है कि यह जमीन उसकी निजी है और उसके साथ जबरन कार्रवाई की गई।
इस कार्रवाई का विरोध करते हुए अफताब आलम मौके पर पहुंचे और प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे अन्यायपूर्ण करार दिया और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की।
इस विरोध और जन कन्वेंशन से साफ संदेश गया कि बिहार में गरीबों, दलितों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे दमन के खिलाफ जनता अब सड़कों पर आवाज़ उठाने को तैयार है।
